भीमाशंकर मंदिर
भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा महाराष्ट्र के तीन ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।

भीमाशंकर मंदिर का महत्व
मान्यता है कि त्रिपुरासुर नामक दानव ने भगवान शिव की घोर तपस्या कर अमरत्व का वरदान प्राप्त किया, किंतु समय के साथ वह देवताओं व मनुष्यों को सताने लगा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव यहां भीमकाय रूप धारण कर प्रकट हुए, तथा माता पार्वती के साथ अर्धनारीश्वर रूप में त्रिपुरासुर का वध किया। इसी भीमकाय रूप के कारण इस ज्योतिर्लिंग को भीमाशंकर कहा जाता है।
मान्यता है कि इस भीषण युद्ध के पश्चात भगवान शिव के शरीर से बहे पसीने से भीमा नदी की उत्पत्ति हुई, जो आगे चलकर पंढरपुर में चंद्रभागा के नाम से जानी जाती है। भीमाशंकर महाराष्ट्र के तीन ज्योतिर्लिंगों (त्र्यंबकेश्वर, औंढा नागनाथ व भीमाशंकर) में से एक है, तथा सह्याद्रि की सघन वनस्पति के मध्य स्थित होने के कारण इसे विशेष प्राकृतिक महत्व भी प्राप्त है।
भीमाशंकर मंदिर दर्शन की जानकारी
मंदिर भीमाशंकर गांव में एक छोटी घाटी में स्थित है, अतः सड़क मार्ग से पार्किंग तक पहुंचने के पश्चात मंदिर तक कुछ सीढ़ियां उतरनी होती हैं। मंदिर के चारों ओर घना वन क्षेत्र है, जो भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है, यह अभयारण्य दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरी (शेकरू) के संरक्षण हेतु विशेष रूप से जाना जाता है।
साहसिक यात्री गणेश घाट अथवा शिड़ी घाट मार्ग से होकर कर्जत की ओर से भी भीमाशंकर तक पहुंच सकते हैं, जो सघन वन से होकर गुजरने वाला 4-6 घंटे का ट्रेक है, यह सामान्य दर्शनार्थियों के लिए आवश्यक नहीं, अपितु ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक लोकप्रिय अतिरिक्त विकल्प है।
भीमाशंकर मंदिर कैसे पहुंचें
भीमाशंकर मंदिर के बारे में
भीमाशंकर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा भीमा नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, त्रिपुरासुर से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
भीमाशंकर मंदिर कहां स्थित है?
यह महाराष्ट्र के पुणे जिले में, सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में, पुणे से लगभग 110-125 किमी दूर स्थित है।
भीमाशंकर नाम कैसे पड़ा?
त्रिपुरासुर दानव का वध करने हेतु भगवान शिव ने यहां एक भीमकाय (विशाल) रूप धारण किया था, जिस कारण इस ज्योतिर्लिंग को भीमाशंकर कहा जाता है।
क्या भीमा नदी का संबंध भीमाशंकर से है?
हां, मान्यता है कि त्रिपुरासुर से युद्ध के पश्चात भगवान शिव के शरीर से बहे पसीने से भीमा नदी की उत्पत्ति हुई, जो आगे चलकर पंढरपुर में चंद्रभागा कहलाती है।
क्या भीमाशंकर पहुंचने के लिए ट्रेकिंग आवश्यक है?
नहीं, सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक सुगमता से पहुंचा जा सकता है, तथा केवल पार्किंग से मंदिर तक कुछ सीढ़ियां उतरनी होती हैं। गणेश घाट अथवा शिड़ी घाट का 4-6 घंटे का ट्रेक केवल साहसिक यात्रियों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग है।
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यात्रा हेतु उचित समय
जुलाई से फरवरी सर्वोत्तम रहता है, मानसून में सह्याद्रि की हरियाली देखने योग्य होती है, तथा अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा हेतु सुखद रहता है। भीषण गर्मी वाले महीनों से बचना उचित है।