तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर तथा पंच केदार श्रृंखला का द्वितीय मंदिर माना जाता है, जहां शिवजी की भुजाओं की पूजा होती है।
तुंगनाथ मंदिर का महत्व
पंच केदार कथा के अनुसार, बैल-रूपी शिवजी भूमि में समाकर पांच भिन्न स्थानों पर पुनः प्रकट हुए थे, तुंगनाथ में उनकी भुजाएं प्रकट हुईं, जिस कारण यहां शिवजी की भुजाओं के रूप में पूजा होती है। पांडवों ने यहां भी एक मंदिर का निर्माण करवाया, जो आज पंच केदार श्रृंखला का द्वितीय व सबसे सुगमता से पहुंचा जा सकने वाला मंदिर है।
तुंगनाथ मंदिर की स्थापत्य शैली कत्यूरी काल की मानी जाती है, तथा यह अपनी अत्यधिक ऊंचाई के कारण विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर कहलाता है। मंदिर चंद्रशिला शिखर के ठीक नीचे स्थित है, जहां से हिमालय की चौखंबा व नंदा देवी सहित कई प्रमुख चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
तुंगनाथ मंदिर दर्शन की जानकारी
तुंगनाथ पंच केदार में सबसे सुगमता से पहुंचा जा सकने वाला मंदिर है, चोपता से मंदिर तक मात्र 3-3.5 किलोमीटर की चढ़ाई है, जो सामान्य गति से 2-3 घंटे में पूरी की जा सकती है। इतनी ऊंचाई पर भी अपेक्षाकृत सुगम होने के कारण यह ट्रेक शुरुआती व अनुभवी दोनों प्रकार के यात्रियों के लिए उपयुक्त माना जाता है, फिर भी ऊंचाई से जुड़ी थकान से बचने हेतु धीमी गति से चढ़ना उचित रहता है।
अधिकांश यात्री तुंगनाथ दर्शन के साथ ही चंद्रशिला शिखर (मंदिर से लगभग 1 किमी आगे, लगभग 4,000 मीटर ऊंचाई) तक भी यात्रा करते हैं, जो अपने 360-डिग्री हिमालयी दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। शीतकाल में भारी हिमपात के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, तथा पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में स्थानांतरित हो जाती है।
तुंगनाथ मंदिर कैसे पहुंचें
तुंगनाथ मंदिर के बारे में
तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित पंच केदार श्रृंखला का द्वितीय मंदिर है, जो विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, चंद्रशिला शिखर से इसका संबंध, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
तुंगनाथ मंदिर कहां स्थित है?
यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में, चोपता से लगभग 3-3.5 किमी की चढ़ाई पर, लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
तुंगनाथ को विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर क्यों कहा जाता है?
लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण, तुंगनाथ को विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर माना जाता है।
क्या तुंगनाथ व चंद्रशिला एक साथ देखे जा सकते हैं?
हां, अधिकांश यात्री तुंगनाथ दर्शन के पश्चात चंद्रशिला शिखर (मंदिर से लगभग 1 किमी आगे) तक भी यात्रा करते हैं, जहां से हिमालय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
तुंगनाथ का ट्रेक कितना कठिन है?
पंच केदार में यह सबसे सुगम ट्रेक है, चोपता से मात्र 3-3.5 किमी, जो 2-3 घंटे में पूरा किया जा सकता है, तथा शुरुआती यात्रियों के लिए भी उपयुक्त है।
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यात्रा हेतु उचित समय
मई-जून तथा सितंबर-नवंबर सर्वोत्तम रहता है। शीतकाल में भारी हिमपात के कारण मंदिर बंद रहता है तथा पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में स्थानांतरित हो जाती है।