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वर्ष की चौबीस एकादशियां · प्रत्येक मास की शुक्ल एवं कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत

एकादशी प्रत्येक हिंदू मास के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है, अर्थात वर्ष में कुल चौबीस बार, तथा इसे भगवान विष्णु के पूजन व व्रत हेतु सबसे पवित्र तिथि माना जाता है।

एकादशी व्रत
अगली तिथि
२२ सितम्बर २०२६

एकादशी प्रत्येक हिंदू मास में दो बार आती है, अतः वर्ष में कुल चौबीस एकादशियां होती हैं। ऊपर दी गई तिथि निकटतम आगामी एकादशी (पार्श्व एकादशी) की है, वर्षभर की सभी चौबीस एकादशियों के नाम व महत्व नीचे दी गई सूची में देखें, तथा सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।

एकादशी व्रत का महत्व

एकादशी को हिंदू पंचांग की सबसे पवित्र तिथियों में गिना जाता है, तथा इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु के पूजन व व्रत हेतु समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से मन व शरीर की शुद्धि होती है, तथा संचित पापों का नाश होकर मोक्ष-प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

विष्णु चालीसा
चालीसा · एकादशी पूजन में पाठ

प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, अपनी पौराणिक कथा तथा अपना विशिष्ट महत्व होता है, किसी एकादशी को संतान-प्राप्ति हेतु रखा जाता है, किसी को पितरों की मुक्ति हेतु, तथा किसी को समस्त पापों के नाश हेतु। यह विविधता स्कंद पुराण व पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में विस्तार से वर्णित है।

ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी को समस्त चौबीस एकादशियों के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है, तथा कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु के चातुर्मास की निद्रा से जागृत होने के दिन के रूप में विशेष महत्व रखती है, जिसके पश्चात मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।

वर्ष की चौबीस एकादशियां

चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी
कामनाओं की पूर्ति व श्राप-मुक्ति
चैत्र कृष्ण पापमोचनी एकादशी
समस्त पापों से मुक्ति
वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी
मोह-भ्रम से मुक्ति, मोहिनी अवतार से जुड़ी
वैशाख कृष्ण वरुथिनी एकादशी
संकटों व दरिद्रता से मुक्ति
ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी (भीमसेनी)
समस्त 24 एकादशियों के तुल्य पुण्य
ज्येष्ठ कृष्ण अपरा एकादशी
अपार यश व पापों से मुक्ति
आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी
भगवान विष्णु के चातुर्मास-शयन का आरंभ
आषाढ़ कृष्ण योगिनी एकादशी
रोग व पापों से मुक्ति
श्रावण शुक्ल श्रावण पुत्रदा एकादशी
संतान-प्राप्ति की कामना
श्रावण कृष्ण कामिका एकादशी
पापों का नाश, वैकुंठ-प्राप्ति
भाद्रपद शुक्ल परिवर्तिनी (वामन) एकादशी
शयनरत विष्णु के करवट बदलने का दिन
भाद्रपद कृष्ण अजा एकादशी
कठिन संकटों से मुक्ति
आश्विन शुक्ल पापांकुशा एकादशी
पापों रूपी हाथी को वश में करने वाला अंकुश
आश्विन कृष्ण इंदिरा एकादशी
पितरों की मुक्ति हेतु
कार्तिक शुक्ल देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी
विष्णु का चातुर्मास-निद्रा से जागरण, तुलसी विवाह से जुड़ी
कार्तिक कृष्ण रमा एकादशी
संकटों से मुक्ति
मार्गशीर्ष शुक्ल मोक्षदा (वैकुंठ) एकादशी
पितरों को मोक्ष, गीता जयंती से जुड़ी
मार्गशीर्ष कृष्ण उत्पन्ना एकादशी
एकादशी देवी की उत्पत्ति की कथा
पौष शुक्ल पौष पुत्रदा एकादशी
संतान-प्राप्ति की कामना
पौष कृष्ण सफला एकादशी
कार्यों में सफलता की प्राप्ति
माघ शुक्ल जया एकादशी
प्रेत-योनि से मुक्ति
माघ कृष्ण षटतिला एकादशी
तिल के छह प्रयोगों से पुण्य-प्राप्ति
फाल्गुन शुक्ल आमलकी एकादशी
आंवले के वृक्ष के पूजन से जुड़ी
फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी
कार्यों में विजय-प्राप्ति

एकादशी व्रत कैसे मनाई जाती है

एकादशी के दिन भक्तगण प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, तथा दिनभर अन्न, विशेषकर चावल का त्याग करते हैं। कुछ भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, तो कुछ अपनी क्षमतानुसार निर्जला व्रत भी रखते हैं।

भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र का पूजन कर विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा अथवा उस एकादशी विशेष की कथा का पाठ किया जाता है। रात्रि में भजन-कीर्तन व जागरण करने की भी परंपरा है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

व्रत का पारण अगले दिन, अर्थात द्वादशी तिथि को, शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में ही किया जाता है, न तो द्वादशी तिथि समाप्त होने के पश्चात, न ही हरि-वासर (एकादशी की समाप्ति के प्रथम भाग) के दौरान, क्योंकि इसे व्रत के फल हेतु अनुचित माना जाता है।

एकादशी व्रत पूजा विधि

एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें, तथा दिनभर अन्न का त्याग करें। भगवान विष्णु का पूजन कर विष्णु सहस्रनाम अथवा संबंधित एकादशी की कथा का पाठ करें। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में ही व्रत का पारण करें।

एकादशी व्रत के बारे में

एकादशी व्रत प्रत्येक हिंदू मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को भगवान विष्णु के पूजन हेतु रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर एकादशी व्रत का सामान्य महत्व, व्रत व पारण की विधि, तथा वर्ष की सभी चौबीस एकादशियों की सूची उनके नाम व महत्व सहित दी गई है।

जिन एकादशियों की पूर्ण कथा इस साइट पर उपलब्ध है, उनके नाम पर सूची में क्लिक कर पूरी कथा पढ़ी जा सकती है। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

एक वर्ष में कुल कितनी एकादशी होती हैं?

सामान्य वर्ष में कुल चौबीस एकादशियां होती हैं, प्रत्येक हिंदू मास के शुक्ल व कृष्ण पक्ष में एक-एक। अधिकमास वाले वर्ष में यह संख्या 26 तक भी हो सकती है।

एकादशी व्रत में अन्न क्यों त्यागा जाता है?

मान्यता है कि एकादशी तिथि पर अन्न, विशेषकर चावल में देवी एकादशी व नकारात्मक शक्तियों का वास होता है, अतः इस दिन अन्न त्यागकर फलाहार अथवा निर्जला व्रत रखने की परंपरा है।

एकादशी व्रत का पारण कब किया जाता है?

व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को, शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में किया जाता है, तथा हरि-वासर के दौरान पारण करना उचित नहीं माना जाता।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी मानी जाती है?

ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी को समस्त 24 एकादशियों के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है, तथा कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु के जागरण व चातुर्मास की समाप्ति के कारण विशेष महत्व रखती है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु
तिथिप्रत्येक पक्ष की एकादशी (ग्यारहवीं तिथि)
वर्ष में संख्याचौबीस एकादशी
विशेष अनुष्ठानअन्न-त्याग सहित व्रत, द्वादशी को पारण
व्रत प्रकारफलाहार अथवा निर्जला, क्षमतानुसार