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कार्यों में सफलता का व्रत · पौष कृष्ण एकादशी

सफला एकादशी

सफला एकादशी पौष मास की कृष्ण एकादशी को मनाई जाती है, तथा इसे कार्यों में सफलता व समस्त प्रयासों के फलदायी होने की कामना से रखा जाता है।

सफला एकादशी
अगली तिथि
३ जनवरी २०२७

यह एकादशी मकर संक्रांति से कुछ दिन पूर्व आती है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।

सफला एकादशी का महत्व

कथा के अनुसार, राजा महिष्मत के पुत्र लुम्पक का आचरण अत्यंत दुष्ट था, जिससे क्रुद्ध होकर राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। लुम्पक वन में रहकर चोरी व अन्य दुष्कर्म करने लगा, किंतु उसके मन में अपने पिता व भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा शेष थी।

विष्णु चालीसा
चालीसा · सफला एकादशी पूजन में पाठ

पौष कृष्ण एकादशी की रात्रि को अत्यंत शीत व भूख से व्याकुल लुम्पक जंगली पशुओं के भय से एक पीपल वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया, जो संयोगवश एक भगवान विष्णु मंदिर के निकट स्थित था। भय व दुर्बलता के कारण वह अन्न ग्रहण नहीं कर सका, तथा भय से रात्रि भर जागता रहा।

इस प्रकार, अनजाने में ही लुम्पक से एकादशी का व्रत व रात्रि-जागरण दोनों संपन्न हो गए। भगवान विष्णु इस अनजाने में हुए व्रत से भी प्रसन्न हुए, तथा उसे शुद्ध हृदय व अपने पिता का राज्य पुनः प्रदान किया। आगे चलकर लुम्पक एक आदर्श व धर्मपरायण राजा बना। इसी कारण सफला एकादशी को अनजाने में भी किए गए पालन का फल देने वाला व अत्यंत फलदायी व्रत माना जाता है।

सफला एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, तथा दिनभर फलाहार व्रत रखते हैं। भगवान विष्णु का पूजन कर सफला एकादशी की कथा का श्रवण किया जाता है।

रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन किया जाता है, तथा भगवान विष्णु को बेर, नारियल, सुपारी व अन्य फलों का भोग अर्पित करने की परंपरा है। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

यह व्रत विशेष रूप से नए कार्यों के आरंभ, व्यापार में उन्नति अथवा किसी महत्वपूर्ण प्रयास में सफलता की कामना से रखा जाता है, तथा राजकुमार लुम्पक की कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि श्रद्धा भाव से किया गया प्रयास अनजाने में भी सफल होता है।

सफला एकादशी पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा फलाहार व्रत रखें। भगवान विष्णु का पूजन कर सफला एकादशी की कथा सुनें, तथा बेर व अन्य फलों का भोग अर्पित करें। रात्रि जागरण करें, तथा अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।

सफला एकादशी के बारे में

सफला एकादशी पौष मास की कृष्ण एकादशी को कार्यों में सफलता की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इस व्रत का महत्व, राजकुमार लुम्पक की कथा, तथा व्रत-विधि की जानकारी दी गई है।

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सामान्य प्रश्न

सफला एकादशी कब मनाई जाती है?

यह व्रत प्रत्येक वर्ष पौष मास की कृष्ण एकादशी तिथि को, मकर संक्रांति से कुछ दिन पूर्व मनाया जाता है।

राजकुमार लुम्पक की कथा क्या है?

पिता द्वारा निकाला गया दुराचारी राजकुमार लुम्पक भय व दुर्बलता के कारण अनजाने में ही एकादशी का व्रत व रात्रि-जागरण कर बैठा, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने उसे शुद्ध हृदय व राज्य पुनः प्रदान किया।

सफला एकादशी को यह नाम क्यों दिया गया?

'सफला' का अर्थ है 'फलदायी', इस व्रत को कार्यों में सफलता व समस्त प्रयासों को फलदायी बनाने वाला माना जाता है, इसीलिए इसका नाम सफला एकादशी पड़ा।

क्या अनजाने में किया गया व्रत भी फलदायी होता है?

राजकुमार लुम्पक की कथा के अनुसार, भय व परिस्थितिवश अनजाने में हुआ एकादशी व्रत व जागरण भी भगवान विष्णु को प्रसन्न कर सकता है, जिससे इस व्रत की महिमा और भी विशेष मानी जाती है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु
तिथिपौष कृष्ण एकादशी
महत्वकार्यों में सफलता की प्राप्ति
संबंधित कथाराजकुमार लुम्पक की कथा
व्रत प्रकारफलाहार व्रत, द्वादशी को पारण