यह पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कुछ दिन पश्चात, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आता है। इसे 'अन्नदा एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।
अजा एकादशी का महत्व
अजा एकादशी की कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है, जिन्होंने सत्य की रक्षा हेतु अपना राज्य, पत्नी तारामती व पुत्र रोहिताश्व तक त्याग दिया, तथा स्वयं एक चांडाल के यहां सेवक बनकर श्मशान का कर वसूलने का कार्य करने लगे।
अपने इस दुःखद जीवन से व्याकुल होकर राजा हरिश्चंद्र ने एक ऋषि से इस कष्ट से मुक्ति का उपाय पूछा, तो ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण एकादशी अर्थात अजा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखने की सलाह दी।
राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, जिसके पुण्य-प्रभाव से उनके समस्त पाप नष्ट हो गए, उन्हें उनका खोया हुआ राज्य, पत्नी व पुत्र पुनः प्राप्त हुए, तथा अंततः वे स्वर्ग को प्राप्त हुए। इसी कारण अजा एकादशी को कठिन से कठिन संकटों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत माना जाता है।
अजा एकादशी कैसे मनाई जाती है
भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, तथा दिनभर फलाहार अथवा निर्जला व्रत रखते हैं। भगवान विष्णु का पूजन कर अजा एकादशी की कथा का श्रवण किया जाता है।
रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन किया जाता है, तथा अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया जाता है।
यह व्रत विशेष रूप से उन भक्तों द्वारा रखा जाता है जो जीवन के कठिन संकटों, ऋण व दरिद्रता से मुक्ति चाहते हैं, तथा राजा हरिश्चंद्र की भांति सत्य व धैर्य के साथ इस व्रत का पालन करने की प्रेरणा देते हैं।
अजा एकादशी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा फलाहार अथवा निर्जला व्रत रखें। भगवान विष्णु का पूजन कर अजा एकादशी की कथा सुनें। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में दान देकर व्रत का पारण करें।
अजा एकादशी के बारे में
अजा एकादशी भाद्रपद मास की कृष्ण एकादशी को कठिन संकटों व पापों से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इस व्रत का महत्व, राजा हरिश्चंद्र की कथा, तथा व्रत-विधि की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
अजा एकादशी कब मनाई जाती है?
यह व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण एकादशी तिथि को, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कुछ दिन पश्चात मनाया जाता है।
राजा हरिश्चंद्र की कथा अजा एकादशी से कैसे जुड़ी है?
सत्य की रक्षा हेतु अपना सब कुछ त्यागने वाले राजा हरिश्चंद्र ने ऋषि के परामर्श पर अजा एकादशी का व्रत रखा, जिसके पुण्य से उन्हें अपना राज्य, परिवार व अंततः स्वर्ग की प्राप्ति हुई।
अजा एकादशी को अन्नदा एकादशी क्यों कहा जाता है?
बंगाल व ओडिशा जैसे कुछ क्षेत्रों में इस एकादशी को 'अन्नदा एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है, यद्यपि इसकी तिथि व मूल महत्व अजा एकादशी के समान ही है।
अजा एकादशी व्रत से क्या लाभ होता है?
मान्यता है कि यह व्रत जीवन के कठिन से कठिन संकटों, पापों व दरिद्रता से मुक्ति दिलाता है, तथा श्रद्धापूर्वक पालन करने पर मोक्ष-प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
