यह एकादशी महाशिवरात्रि से कुछ दिन पूर्व आती है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।
विजया एकादशी का महत्व
कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम माता सीता को रावण की लंका से मुक्त कराने हेतु समुद्र तट पर पहुंचे, तो विशाल समुद्र को पार करने का कोई उपाय न देखकर वे चिंतित हो उठे। उसी समय उन्हें समुद्र तट के निकट निवास करने वाले ऋषि बकदाल्भ्य के दर्शन हुए।
ऋषि बकदाल्भ्य ने भगवान श्रीराम को फाल्गुन कृष्ण एकादशी अर्थात विजया एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखने की सलाह दी, तथा बताया कि इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें समुद्र पार करने का मार्ग व लंका पर विजय प्राप्त होगी।
भगवान श्रीराम ने ऋषि के परामर्श अनुसार इस व्रत का पालन किया, जिसके पश्चात ही नल-नील के नेतृत्व में सेतु-निर्माण संभव हो सका, तथा भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। इसी कारण इस एकादशी का नाम 'विजया एकादशी' पड़ा, तथा इसे किसी भी कठिन कार्य में विजय-प्राप्ति हेतु अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
विजया एकादशी कैसे मनाई जाती है
भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, तथा दिनभर फलाहार अथवा निर्जला व्रत रखते हैं। भगवान विष्णु का पूजन कर विजया एकादशी की कथा का श्रवण किया जाता है।
एक विशेष परंपरा के अनुसार, इस दिन एक मिट्टी के घड़े में जल भरकर उसमें आम का एक पत्ता रखकर उसे किसी वृक्ष के नीचे गाड़ा जाता है, जिसे कार्य में सफलता व विजय का प्रतीक माना जाता है।
अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन भक्तों द्वारा रखा जाता है जो किसी महत्वपूर्ण कार्य, परीक्षा अथवा प्रतियोगिता में विजय-प्राप्ति की कामना रखते हैं।
विजया एकादशी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा फलाहार व्रत रखें। भगवान विष्णु का पूजन कर विजया एकादशी की कथा सुनें। संभव हो तो मिट्टी के घड़े में जल व आम का पत्ता रखकर वृक्ष के नीचे गाड़ें। अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।
विजया एकादशी के बारे में
विजया एकादशी फाल्गुन मास की कृष्ण एकादशी को कार्यों में विजय-प्राप्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इस व्रत का महत्व, भगवान श्रीराम की लंका विजय की कथा, तथा व्रत-विधि की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
विजया एकादशी कब मनाई जाती है?
यह व्रत प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण एकादशी तिथि को, महाशिवरात्रि से कुछ दिन पूर्व मनाया जाता है।
विजया एकादशी भगवान श्रीराम से कैसे जुड़ी है?
समुद्र पार करने का उपाय न मिलने पर ऋषि बकदाल्भ्य के परामर्श पर भगवान श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था, जिसके पश्चात ही सेतु-निर्माण संभव हुआ तथा उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।
विजया एकादशी को यह नाम क्यों दिया गया?
इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीराम को लंका पर विजय प्राप्त हुई थी, इसी कारण इस एकादशी का नाम 'विजया' अर्थात 'विजय देने वाली' एकादशी पड़ा।
विजया एकादशी व्रत किसे रखना चाहिए?
यह व्रत विशेष रूप से वे भक्त रखते हैं जो किसी महत्वपूर्ण कार्य, परीक्षा, प्रतियोगिता अथवा जीवन के बड़े लक्ष्य में विजय-प्राप्ति की कामना रखते हैं।
