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मोह-भ्रम से मुक्ति का व्रत · वैशाख शुक्ल एकादशी

मोहिनी एकादशी

मोहिनी एकादशी वैशाख मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार इसके व्रत से मनुष्य मोहजाल और पापों के समूह से छूट जाता है, इसलिए इसे मोह-भ्रम से मुक्ति का व्रत कहा जाता है।

मोहिनी एकादशी
अगली तिथि
१६ मई २०२७

यह एकादशी अक्षय तृतीया के कुछ दिन पश्चात व नरसिंह जयंती के कुछ दिन पूर्व आती है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।

मोहिनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि यही प्रश्न कभी श्रीराम ने महर्षि वसिष्ठ से पूछा था: सब पापों का नाश और सब दुःखों का निवारण करने वाला सबसे उत्तम व्रत कौन-सा है। वसिष्ठ जी ने वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी बताई, जिसके प्रभाव से मनुष्य मोहजाल और पापों के समूह से छूट जाता है।

मोहिनी एकादशी व्रत कथा
कथा · धृष्टबुद्धि और कौण्डिन्य की पूरी कथा

कथा के अनुसार, सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नगरी में चंद्रवंशी राजा धृतिमान राज्य करते थे। उसी नगर में धनपाल नाम का एक धनी और पुण्यात्मा वैश्य रहता था, जो पौसले, कुएं, मठ, बगीचे और पोखर बनवाता था। उसके पांच पुत्र थे: सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत और धृष्टबुद्धि। सबसे छोटा धृष्टबुद्धि जुए और कुसंग में डूबा रहता था और पिता का धन उड़ाता था।

एक दिन उसे वेश्या के गले में बांह डाले चौराहे पर घूमते देखकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया, और भाई-बंधुओं ने भी उसका साथ छोड़ दिया। दुःख में भटकते हुए वैशाख मास में वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पहुंचा, जो गंगा स्नान करके लौटे थे। कौण्डिन्य ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने को कहा, जिसके उपवास से अनेक जन्मों के मेरु पर्वत जैसे पाप भी नष्ट हो जाते हैं। विधि से व्रत करके धृष्टबुद्धि निष्पाप हो गया, और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर बैठकर विष्णुधाम को गया।

मोहिनी एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और धृष्टबुद्धि की कथा सुनते हैं। पद्म पुराण के अनुसार इस माहात्म्य को पढ़ने और सुनने से सहस्र गोदान का फल मिलता है।

कई परंपराओं में यह भी माना जाता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने इसी तिथि को मोहिनी रूप धारण किया था, और नाम की समानता के कारण इस एकादशी को उस प्रसंग से भी जोड़ा जाता है। पुराण की कथा में यह प्रसंग नहीं आता; वहां 'मोहिनी' का अर्थ मोह से छुड़ाने वाली तिथि है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

व्रत अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में खोला जाता है। यह एकादशी अक्षय तृतीया के कुछ दिन बाद आती है, जब वैशाख का पुण्य मास चल रहा होता है।

मोहिनी एकादशी पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा फलाहार व्रत रखें। भगवान विष्णु का पूजन कर धृष्टबुद्धि की कथा सुनें। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में दान देकर व्रत का पारण करें।

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मोहिनी एकादशी के बारे में

मोहिनी एकादशी वैशाख मास की शुक्ल एकादशी को मोह और पापों से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर पद्म पुराण के अनुसार इसका महत्व, धृष्टबुद्धि और महर्षि कौण्डिन्य की कथा, तथा मोहिनी अवतार से इसके लोक-प्रचलित संबंध की जानकारी दी गई है।

सामान्य प्रश्न

मोहिनी एकादशी कब मनाई जाती है?

यह व्रत प्रत्येक वर्ष वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाता है।

मोहिनी एकादशी का नाम कैसे पड़ा?

पद्म पुराण में महर्षि वसिष्ठ कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल से छूट जाता है, इसलिए यह मोहिनी कहलाती है। लोक में इसे समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु के मोहिनी रूप धारण करने से भी जोड़ा जाता है।

धृष्टबुद्धि की कथा क्या है?

भद्रावती के वैश्य धनपाल का पुत्र धृष्टबुद्धि पिता का धन नष्ट कर पापकर्मों में लिप्त हो गया और घर से निकाला गया। उसने महर्षि कौण्डिन्य के परामर्श पर मोहिनी एकादशी का व्रत रखा, जिसके पुण्य से उसके समस्त पाप नष्ट हुए और वह दिव्य देह पाकर गरुड़ पर विष्णुधाम गया।

मोहिनी एकादशी व्रत से क्या लाभ होता है?

मान्यता है कि यह व्रत मनुष्य को सांसारिक मोह-भ्रम व समस्त पापों से मुक्त करता है, तथा सत्य को पहचानने की दृष्टि प्रदान करता है।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु
तिथिवैशाख शुक्ल एकादशी
महत्वमोह-भ्रम व पापों से मुक्ति
व्रत कथाधृष्टबुद्धि और महर्षि कौण्डिन्य
व्रत प्रकारफलाहार व्रत, द्वादशी को पारण