मोहिनी एकादशी
मोहिनी एकादशी वैशाख मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जिसका नाम भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा है, तथा इसे मोह-भ्रम व पापों से मुक्ति की कामना से रखा जाता है।

यह एकादशी अक्षय तृतीया के कुछ दिन पश्चात व नृसिंह जयंती के कुछ दिन पूर्व आती है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।
मोहिनी एकादशी का महत्व
समुद्र मंथन से जब अमृत कलश प्रकट हुआ, तो देवताओं व असुरों के बीच उसे प्राप्त करने हेतु विवाद छिड़ गया। इस विवाद को शांत करने तथा अमृत को केवल देवताओं तक पहुंचाने हेतु भगवान विष्णु ने एक अत्यंत मोहक स्त्री, 'मोहिनी' का रूप धारण किया।
मोहिनी के अलौकिक सौंदर्य से मोहित होकर असुरों ने अमृत-वितरण का उत्तरदायित्व स्वयं मोहिनी को सौंप दिया। मोहिनी रूपी भगवान विष्णु ने अत्यंत चतुराई से केवल देवताओं को ही अमृत पान कराया, जिससे देवता अमर हो गए तथा असुरों पर विजय प्राप्त कर सके।
इसी प्रसंग की स्मृति में वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से मनाया जाता है, तथा मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य सांसारिक मोह-भ्रम से मुक्त होकर सत्य को पहचानने की दृष्टि प्राप्त करता है, ठीक वैसे ही जैसे मोहिनी रूप ने असुरों के मोह का उपयोग सत्य (अमृत का सही वितरण) स्थापित करने हेतु किया।
मोहिनी एकादशी कैसे मनाई जाती है
एक प्रचलित व्रत कथा के अनुसार, भद्रावती नगरी के राजा धनपाल के पुत्र धृष्टबुद्धि ने पिता के धन का दुरुपयोग कर उसे नष्ट कर दिया, तथा पापकर्मों में लिप्त हो गया। पश्चाताप से व्याकुल होकर वह वन में भटकने लगा, जहां उसे महर्षि कौण्डिन्य मिले।
महर्षि कौण्डिन्य ने धृष्टबुद्धि को उसके पापों से मुक्ति हेतु मोहिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखने की सलाह दी। धृष्टबुद्धि ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, जिसके पुण्य-प्रभाव से उसके समस्त पाप नष्ट हो गए तथा उसे दिव्य देह की प्राप्ति हुई।
इसी कथा के स्मरण में भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार का पूजन करते हैं, तथा अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत का पारण करते हैं।
मोहिनी एकादशी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा फलाहार व्रत रखें। भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार का पूजन कर धृष्टबुद्धि की कथा सुनें। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में दान देकर व्रत का पारण करें।
मोहिनी एकादशी के बारे में
मोहिनी एकादशी वैशाख मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के स्मरण में मनाया जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इस व्रत का महत्व, समुद्र मंथन में मोहिनी अवतार की कथा, तथा धृष्टबुद्धि की व्रत कथा की जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
मोहिनी एकादशी कब मनाई जाती है?
यह व्रत प्रत्येक वर्ष वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाता है।
मोहिनी एकादशी का नाम कैसे पड़ा?
समुद्र मंथन से निकले अमृत को देवताओं व असुरों के विवाद से बचाकर केवल देवताओं तक पहुंचाने हेतु भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक अत्यंत मोहक स्त्री का रूप धारण किया था, इसी प्रसंग के स्मरण में इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा।
धृष्टबुद्धि की कथा क्या है?
अपने पिता का धन नष्ट कर पापकर्मों में लिप्त हुए धृष्टबुद्धि ने महर्षि कौण्डिन्य के परामर्श पर मोहिनी एकादशी का व्रत रखा, जिसके पुण्य से उसके समस्त पाप नष्ट होकर उसे दिव्य देह की प्राप्ति हुई।
मोहिनी एकादशी व्रत से क्या लाभ होता है?
मान्यता है कि यह व्रत मनुष्य को सांसारिक मोह-भ्रम व समस्त पापों से मुक्त करता है, तथा सत्य को पहचानने की दृष्टि प्रदान करता है।