श्री दुर्गा सप्तशती
मार्कण्डेय पुराण के 700 श्लोकों में देवी महात्म्य, जिसे चण्डी पाठ भी कहते हैं। यहाँ पूरा मूल संस्कृत पाठ उसी क्रम में दिया गया है, जिसमें इसका पाठ किया जाता है।

पाठ का क्रम
पहले कवच, फिर अर्गला और कीलक, उसके बाद तेरह अध्याय पढ़े जाते हैं।
पाठ से पूर्व
तेरह अध्याय
प्रथम चरित्र (महाकाली)
मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी)
उत्तर चरित्र (महासरस्वती)
५देवताओं द्वारा स्तुति व शुम्भ के दूत का संवाददुर्गा सप्तशती पंचम अध्याय१२९ श्लोक६धूम्रलोचन वधदुर्गा सप्तशती षष्ठ अध्याय२४ श्लोक७चण्ड-मुण्ड वधदुर्गा सप्तशती सप्तम अध्याय२७ श्लोक८रक्तबीज वधदुर्गा सप्तशती अष्टम अध्याय६३ श्लोक९निशुम्भ वधदुर्गा सप्तशती नवम अध्याय४१ श्लोक१०शुम्भ वधदुर्गा सप्तशती दशम अध्याय३२ श्लोक११देवताओं द्वारा नारायणी स्तुति व देवी का वरदानदुर्गा सप्तशती एकादश अध्याय५५ श्लोक१२देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्यदुर्गा सप्तशती द्वादश अध्याय४१ श्लोक१३सुरथ और वैश्य को देवी का वरदानदुर्गा सप्तशती त्रयोदश अध्याय२९ श्लोक
सात दिनों का पाठ-क्रम
जो एक दिन में पूरा पाठ न कर सकें, उनके लिये पाठविधि में एक, दो, एक, चार, दो, एक और दो अध्यायों के क्रम से सात दिनों में पाठ पूरा करने का विधान बताया गया है। नवरात्रि में प्रतिपदा से आरंभ करने पर यह क्रम सप्तमी तक पूरा होता है।
- दिन १
- दिन २
- दिन ३
- दिन ४
- दिन ५
- दिन ६
- दिन ७