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दीपावली की संध्या · कार्तिक अमावस्या, प्रदोष काल

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन

दीपावली की संध्या, कार्तिक अमावस्या के प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख, समृद्धि और बुद्धि का वास हो।

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन
अगली तिथि
८ नवम्बर २०२६

2026 में अमावस्या तिथि 8 नवम्बर को प्रातः 11:28 से 9 नवम्बर दोपहर 12:31 तक है, इसलिए प्रदोष काल में अमावस्या 8 नवम्बर की संध्या को ही मिलती है। मुहूर्त शहर अनुसार कुछ मिनट बदलता है, अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से मिला लें।

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व

कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी की पूजा का सबसे शुभ समय मानी जाती है। मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित और श्रद्धा से भरे घरों में वास करती हैं, इसीलिए दीपावली पर घर की सफ़ाई और दीप जलाने की परंपरा है।

लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा इसलिए होती है कि धन के साथ उसे सही ढंग से उपयोग करने की बुद्धि भी मिले, और हर शुभ कार्य की तरह पूजा भी विघ्नहर्ता गणेश से आरंभ हो। धन के रक्षक कुबेर की पूजा भी इसी संध्या की जाती है, और व्यापारी इसी दिन नए बही-खाते आरंभ करते हैं।

दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा
कथा · पूजन के बाद पढ़ें

पूजा प्रदोष काल में, अमावस्या तिथि रहते की जाती है। इसमें भी स्थिर लग्न, विशेषकर वृषभ लग्न, को श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं।

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन कैसे करें

दिन में घर की सफ़ाई कर द्वार पर रंगोली और तोरण सजाया जाता है। संध्या को स्नान कर, नए या स्वच्छ वस्त्र पहनकर, परिवार के सभी सदस्य एक साथ पूजा में बैठते हैं।

पूजा के बाद थाली में सजाए दीपों को पूजकर पूरे घर, आंगन, छत और द्वार पर रखा जाता है। कई परिवार रात भर एक दीपक जलता रखते हैं और प्रसाद बांटकर एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं।

संक्षेप में विधि

प्रदोष काल में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और कलश स्थापित करें। पवित्रीकरण और संकल्प के बाद पहले गणेश जी, फिर मां लक्ष्मी की पूजा करें: तिलक, पुष्प, कमल, खील-बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। फिर कुबेर व बही-खाते की पूजा करें, थाली के दीपों को पूजकर घर भर में रखें, और लक्ष्मी व गणेश की आरती कर प्रसाद बांटें।

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2026

तिथिरविवार, 8 नवम्बर 2026
लक्ष्मी पूजन मुहूर्तसंध्या 5:54 से 7:50 तक (वृषभ लग्न)
प्रदोष कालसंध्या 5:31 से 8:09 तक
अमावस्या तिथि8 नवम्बर प्रातः 11:28 से 9 नवम्बर दोपहर 12:31 तक

समय नई दिल्ली के अनुसार। इस वर्ष नरक चतुर्दशी भी 8 नवम्बर को ही है: उसका अभ्यंग स्नान सुबह और लक्ष्मी पूजन संध्या को होगा।

लक्ष्मी-गणेश पूजन की सामग्री

  • लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा या चित्र
  • लकड़ी की चौकी और लाल वस्त्र
  • कलश, आम के पत्ते, नारियल
  • रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • कमल, लाल पुष्प और गेंदे की माला
  • दूर्वा (गणेश जी के लिए)
  • पंचामृत
  • खील-बताशे
  • लड्डू या मोदक, मिठाई
  • फल
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची
  • इत्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर
  • मिट्टी के दीप, घी या तेल, बत्ती
  • चांदी के सिक्के या धन
  • बही-खाते, कलम (व्यापारियों के लिए)
  • लाल चुनरी, कलावा

लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि

सामग्री मुहूर्त से पहले सजा लें, फिर मुहूर्त में परिवार सहित क्रम से ये चरण करें।

  1. १

    चौकी और प्रतिमा स्थापना

    पूजा स्थान पर चौकी रखकर लाल वस्त्र बिछाएं, उस पर अक्षत से स्वास्तिक बनाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पास में जल भरा कलश रखें, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।

  2. २

    पवित्रीकरण और संकल्प

    स्वयं पर, परिवार पर और पूजा सामग्री पर जल छिड़ककर पवित्रीकरण करें। फिर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प करें।

  3. ३

    गणेश पूजन

    सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें: तिलक लगाएं, दूर्वा, पुष्प और लड्डू या मोदक अर्पित करें, और "ॐ गं गणपतये नमः" का जप करें।

  4. ४

    कलश पूजन

    कलश पर रोली से तिलक कर कलावा बांधें और पुष्प व अक्षत अर्पित करें।

  5. ५

    लक्ष्मी पूजन

    मां लक्ष्मी का आवाहन करें। पंचामृत और जल से स्नान कराएं (प्रतिमा या चांदी के सिक्के को), चुनरी ओढ़ाएं, रोली, सिंदूर, अक्षत और कमल व लाल पुष्प अर्पित करें। इत्र, धूप-दीप के बाद खील-बताशे, मिठाई, फल और पान-सुपारी का भोग लगाएं, और "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" का जप करें।

  6. ६

    कुबेर और बही-खाता पूजन

    तिजोरी या धन रखने के स्थान पर कुबेर की पूजा करें। व्यापारी नए बही-खातों और कलम पर रोली से स्वास्तिक बनाकर उनकी पूजा करते हैं।

  7. ७

    दीप पूजन

    थाली में 11, 21 या अधिक दीप जलाकर उनकी पूजा करें, फिर उन्हें घर के हर कोने, आंगन, छत और मुख्य द्वार पर रखें।

  8. ८

    आरती और प्रसाद

    परिवार सहित पहले गणेश जी की, फिर मां लक्ष्मी की आरती करें, पुष्पांजलि अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांटें।

दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा पढ़ें
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दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन के बारे में

दीपावली का लक्ष्मी-गणेश पूजन कार्तिक अमावस्या की संध्या का मुख्य अनुष्ठान है। इस पृष्ठ पर 2026 का मुहूर्त, पूजन सामग्री की पूरी सूची, और गणेश, लक्ष्मी, कुबेर व दीप पूजन की चरण-दर-चरण विधि दी गई है।

सामान्य प्रश्न

2026 में लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त क्या है?

रविवार, 8 नवम्बर 2026 को संध्या 5:54 से 7:50 तक (नई दिल्ली)। यह प्रदोष काल (5:31 से 8:09) के भीतर वृषभ लग्न का समय है।

लक्ष्मी पूजन में पहले किसकी पूजा होती है?

हर शुभ कार्य की तरह पहले भगवान गणेश की पूजा होती है, फिर कलश, मां लक्ष्मी, कुबेर और अन्त में दीपों की।

अगर मुहूर्त छूट जाए तो?

प्रदोष काल (8:09 तक) में अमावस्या रहते पूजा की जा सकती है। उसके बाद भी अमावस्या की रात में श्रद्धा से की गई पूजा मान्य है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवतामां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर
2026 मुहूर्त8 नवम्बर, संध्या 5:54 से 7:50
प्रदोष कालसंध्या 5:31 से 8:09
मुख्य भोगखील-बताशे, मिठाई, फल
पूजा का क्रमपहले गणेश, फिर लक्ष्मी, कुबेर व दीप पूजन