पापांकुशा एकादशी 2026: 22 अक्टूबर को व्रत, पारण 23 को सुबह 6:27 से 8:42

पापांकुशा एकादशी का व्रत गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है। व्रत का पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर को प्रातः 6:27 से 8:42 के बीच करें (नई दिल्ली)।
- एकादशी तिथि
- 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 से 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 तक
- व्रत
- गुरुवार, 22 अक्टूबर
- पारण
- 23 अक्टूबर, प्रातः 6:27 से 8:42
- द्वादशी समाप्त
- 23 अक्टूबर, दोपहर 2:35
पारण का समय क्यों मायने रखता है
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि रहते ही खोला जाता है। इस बार द्वादशी 23 अक्टूबर की दोपहर 2:35 तक है, और पारण का उत्तम समय सुबह 6:27 से 8:42 है। व्रत तोड़ने से पहले भगवान विष्णु की पूजा कर, तुलसी दल डालकर भोग लगाएं।
पारण द्वादशी के पहले चौथाई भाग, जिसे हरिवासर कहते हैं, में नहीं किया जाता, और दोपहर के मध्याह्न में भी इससे बचने की सलाह दी जाती है। इस बार हरिवासर 22 अक्टूबर की रात ही समाप्त हो जाता है, इसलिए 23 की सुबह पारण में कोई बाधा नहीं। किसी कारण सुबह का समय निकल जाए, तो भी द्वादशी समाप्त होने, यानी दोपहर 2:35, से पहले पारण अवश्य कर लें।
व्रत 22 को ही क्यों
एकादशी तिथि 21 अक्टूबर की दोपहर 2:11 पर लगती है, इसलिए कुछ कैलेंडरों में 21 तारीख भी दिखती है। पर एकादशी का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो। 21 अक्टूबर के सूर्योदय पर दशमी है, जबकि 22 अक्टूबर के सूर्योदय (6:26) पर एकादशी, इसलिए गृहस्थों का व्रत 22 को है।
पापों पर अंकुश
आश्विन शुक्ल पक्ष की यह एकादशी दशहरे के दो दिन बाद आती है। अंकुश वह कांटा है जिससे हाथी को वश में किया जाता है; मान्यता है कि यह व्रत उसी तरह पापों पर अंकुश लगाता है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा होती है।
पद्म पुराण में इसका माहात्म्य स्वयं श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं: जितेंद्रिय मुनि लंबी तपस्या से जो फल पाते हैं, वह इस दिन गरुड़ध्वज भगवान को प्रणाम करने भर से मिल जाता है। इस व्रत को करने वाला मातृ पक्ष, पितृ पक्ष और पत्नी के पक्ष की दस-दस पीढ़ियों का उद्धार करता है, और जो इस दिन सोना, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, वह यमराज को नहीं देखता।
- दशमी की संध्या से ही सात्विक भोजन लें, एकादशी को चावल न खाएं।
- एकादशी को विष्णु सहस्रनाम या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करें।
- रात्रि जागरण कर कथा सुनें, और अगले दिन पारण से पहले दान करें।
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आपके सवाल
जो निर्जला व्रत न रख सकें वे क्या करें?
एकादशी का व्रत निर्जला, केवल जल के साथ, या फल और दूध के साथ रखा जाता है। अपने स्वास्थ्य के अनुसार इनमें से कोई एक संकल्प लें, और रोग या दवा की स्थिति में डॉक्टर की सलाह मानें।
पारण किस चीज़ से करें?
भगवान को अर्पित भोजन, तुलसी दल के साथ, प्रसाद रूप में लेकर व्रत खोला जाता है। कई परिवार पहले जल या फल लेते हैं और फिर सात्विक भोजन करते हैं।
पापांकुशा एकादशी पर किसकी पूजा होती है?
भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की, यानी वे विष्णु जिनकी नाभि से कमल निकला और उस पर ब्रह्मा जी विराजे।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।



