20 अक्टूबर 2026 का पर्व

दशहरा 2026: 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त 1:59 से 2:45, रावण दहन और शस्त्र पूजा

आस्था संग्रह संपादकीय टीम

संध्या के समय धनुष ताने श्रीराम, जलता हुआ रावण का पुतला और रामलीला मैदान में भीड़

दशहरा (विजयादशमी) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से 2:45 तक है, और रावण दहन सूर्यास्त (लगभग 5:46) के बाद होगा (नई दिल्ली)।

इस बार क्या अलग है

दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 पर लगती है और 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 तक रहती है। दोपहर का विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दशमी में पड़ता है, इसलिए उत्तर भारत में दशहरा 20 को है। बंगाल में विजया दशमी, सिंदूर खेला और प्रतिमा विसर्जन 21 अक्टूबर को होंगे। 20 अक्टूबर को श्रवण नक्षत्र भी शाम 6:02 तक है, जिसे विजयादशमी के लिए शुभ माना जाता है।

दशमी तिथि
20 अक्टूबर दोपहर 12:50 से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 तक
विजय मुहूर्त
20 अक्टूबर, दोपहर 1:59 से 2:45
रावण दहन
20 अक्टूबर, सूर्यास्त (लगभग 5:46) के बाद
बंगाल विजया दशमी
21 अक्टूबर, अपराह्न पूजा 1:14 से 3:30

दशहरे के दिन क्या करें

  • दोपहर 12:50 पर नवमी समाप्त होने के बाद, दशमी में, नवरात्रि व्रत का पारण करें और कलश का विसर्जन करें।
  • विजय मुहूर्त में शमी वृक्ष और अपराजिता देवी की पूजा करें।
  • अपने औज़ारों, वाहन और पुस्तकों की शस्त्र पूजा करें।
  • संध्या को रामलीला में रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों का दहन देखें।

विजय का दिन

विजयादशमी दो विजयों का दिन है: भगवान राम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर। मान्यता है कि लंका जाने से पहले श्रीराम ने शमी वृक्ष का पूजन किया था, और पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी वृक्ष पर ही छिपाए थे। इसीलिए कई क्षेत्रों में इस दिन शमी के पत्ते सोने के रूप में बांटने की परंपरा है।

शमी और अपराजिता पूजा

अपराजिता पूजा अपराह्न में, विजय मुहूर्त के आसपास, घर के ईशान कोण में की जाती है: भूमि पर अष्टदल बनाकर उसमें अपराजिता देवी का आवाहन होता है और विजय की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद शमी वृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा की जाती है और उसके पत्ते घर लाए जाते हैं। शमी के पत्ते देते समय यह श्लोक पढ़ा जाता है:

शमी प्रार्थना

शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी।अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥

अर्थात शमी पाप का शमन करती है और शत्रुओं का नाश करती है, उसने अर्जुन का धनुष धारण किया और वह श्रीराम को प्रिय है। मान्यता है कि दशहरे पर नीलकंठ पक्षी का दर्शन भी शुभ होता है।

देश भर में दशहरा

उत्तर भारत में दस दिन की रामलीला के बाद रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों का दहन होता है। महाराष्ट्र में सीमोल्लंघन की परंपरा है और आपटा के पत्ते 'सोना' कहकर बांटे जाते हैं। मैसूरु में दसरा का समापन जंबू सवारी से होता है, जिसमें हाथी पर मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा निकलती है। हिमाचल के कुल्लू में दशहरा इसी दिन आरंभ होकर सात दिन चलता है, और बंगाल में यह विजया दशमी है, जो इस वर्ष 21 अक्टूबर को है।

आपके सवाल

रावण दहन किस समय होगा?

सूर्यास्त के बाद, नई दिल्ली में लगभग 5:46 के बाद। हर रामलीला समिति अपना समय तय करती है, इसलिए स्थानीय समिति की घोषणा देखें।

शस्त्र पूजा कब करें?

दशहरे के दिन विजय मुहूर्त (दोपहर 1:59 से 2:45) शस्त्र पूजा और किसी नए काम की शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

दशहरा 21 अक्टूबर को भी मनाया जाएगा?

उत्तर भारत में नहीं, क्योंकि दोपहर का विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दशमी में पड़ता है। बंगाल और कुछ पूर्वी राज्यों में विजया दशमी और विसर्जन 21 अक्टूबर को हैं।

तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।