
कोलकाता में दुर्गा पूजा 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर की महाषष्ठी से शुरू होकर बुधवार, 21 अक्टूबर की विजया दशमी तक है। महाअष्टमी 19 अक्टूबर को है, जिस दिन संधि पूजा प्रातः लगभग 10:27 से 11:15 तक होगी।
इस बार क्या अलग है
इस वर्ष उत्तर भारत और बंगाल की तिथियां एक दिन अलग हैं। उत्तर भारत में नवमी 19 और दशहरा 20 अक्टूबर को है, जबकि बंगाल में महानवमी 20 और विजया दशमी 21 अक्टूबर को। बोधन को लेकर भी पंजिकाओं में अंतर है: द्रिक पंचांग इसे 17 अक्टूबर को रखता है, जबकि कुछ बंगाली पंजिकाएं 16 अक्टूबर की संध्या को। अपने पंडाल की पंजिका का समय मानें।
महालया से बोधन तक
देवी पक्ष महालया से आरंभ होता है, जो इस वर्ष 10 अक्टूबर को है। इसी दिन पितृ पक्ष समाप्त होता है, और बंगाल में भोर में रेडियो पर 'महिषासुरमर्दिनी' सुनने की परंपरा है। पारंपरिक रूप से मूर्तिकार इसी दिन प्रतिमा की आंखें बनाते हैं, जिसे चक्षुदान कहते हैं।
षष्ठी की संध्या बोधन होता है, जिसमें बेल वृक्ष के नीचे देवी का आवाहन कर उन्हें जगाया जाता है। मान्यता है कि शरद ऋतु में देवता निद्रा में होते हैं, और रावण से युद्ध से पहले श्रीराम ने इसी ऋतु में देवी को असमय जगाकर पूजा था। इसीलिए बंगाल की शारदीय पूजा को अकाल बोधन भी कहते हैं।
दुर्गा पूजा 2026: दिन-प्रतिदिन
- 10 अक्टूबर, शनिवार
- महालया, देवी पक्ष का आरंभ
- 17 अक्टूबर, शनिवार
- महाषष्ठी: कल्पारम्भ, बोधन, अधिवास
- 18 अक्टूबर, रविवार
- महासप्तमी: कोलाबोउ (नवपत्रिका) स्नान
- 19 अक्टूबर, सोमवार
- महाअष्टमी: पुष्पांजलि, कुमारी पूजा, संधि पूजा
- 20 अक्टूबर, मंगलवार
- महानवमी: नवमी होम
- 21 अक्टूबर, बुधवार
- विजया दशमी: सिंदूर खेला, विसर्जन
उमा का घर आना
बंगाल में दुर्गा पूजा को देवी के मायके आने का उत्सव माना जाता है: हिमालय की पुत्री उमा वर्ष में एक बार अपने बच्चों, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ घर लौटती हैं। इसीलिए पंडालों में महिषासुरमर्दिनी के साथ ये चारों भी विराजते हैं, और दशमी की विदाई में आनंद के साथ आंखें भी नम होती हैं।
सप्तमी की भोर केले के पौधे के साथ नौ पौधे बांधकर बनी नवपत्रिका को स्नान कराकर लाल किनारी की साड़ी पहनाई जाती है और गणेश जी के पास रखा जाता है। अष्टमी की सुबह की पुष्पांजलि में सबसे अधिक भीड़ होती है, और दशमी को विवाहित स्त्रियां देवी को सिंदूर लगाकर विदा करती हैं।
आपके सवाल
अष्टमी की पुष्पांजलि कब है?
महाअष्टमी की सुबह, सोमवार 19 अक्टूबर को। परंपरा है कि पुष्पांजलि उपवास रखकर दी जाए। पंडालों में यह कई पालियों में होती है, इसलिए अपने पंडाल का समय पहले देख लें।
कुमारी पूजा क्या है?
अष्टमी को एक छोटी कन्या को स्वयं देवी का रूप मानकर विधि से पूजा जाता है। बेलूर मठ की कुमारी पूजा सबसे प्रसिद्ध है। उत्तर भारत में इसी भाव से कन्या पूजन होता है।
सिंदूर खेला कब है?
विजया दशमी, बुधवार 21 अक्टूबर को, प्रतिमा विसर्जन से पहले। विवाहित स्त्रियां पहले देवी को सिंदूर और मिठाई अर्पित करती हैं, फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
संधि पूजा का समय कोलकाता और दिल्ली में अलग है?
नहीं। संधि काल अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ से तय होता है, जो हर जगह एक ही क्षण है, इसलिए यह लगभग 10:27 से 11:15 तक ही रहेगा।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, कोलकाता के अनुसार।



