संधि पूजा
संधि पूजा अष्टमी तिथि के अन्तिम 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट, यानी 48 मिनट के संधि काल में मां चामुण्डा की पूजा है। इसे दुर्गा पूजा का सबसे शक्तिशाली क्षण माना जाता है।

संधि काल तिथि बदलने के क्षण पर निर्भर है, इसलिए यह पूरे भारत में लगभग एक ही समय होता है। बंगाल के कुछ पंजिकाओं की गणना से समय कुछ अलग आ सकता है, अपने पूजा पंडाल या पंजिका का समय मान्य रखें। 2027 में संधि पूजा 8 अक्टूबर को प्रातः 6:03 से 6:51 तक है।
संधि पूजा का महत्व
संधि का अर्थ है जोड़। अष्टमी तिथि के अन्त और नवमी के आरंभ के जोड़ पर दो घटी, यानी लगभग 48 मिनट का समय संधि काल कहलाता है। मान्यता है कि इसी क्षण देवी चामुण्डा प्रकट हुईं और उन्होंने चण्ड और मुण्ड नाम के असुरों का वध किया।
दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय में यही कथा है: देवी के क्रोध से उनके ललाट से काली प्रकट होती हैं, चण्ड-मुण्ड का वध करती हैं, और उसी से उनका नाम चामुण्डा पड़ता है। इसलिए संधि पूजा में इस अध्याय का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
संधि पूजा कैसे करें
बंगाल की दुर्गा पूजा में संधि पूजा सबसे बड़ा अनुष्ठान है। पंडालों में 108 दीप जलाए जाते हैं, 108 कमल अर्पित किए जाते हैं और ढाक की थाप के बीच मां चामुण्डा की पूजा होती है। समय इतना महत्वपूर्ण है कि पूजा ठीक संधि काल के भीतर ही पूरी की जाती है।
घर पर भी संधि काल में दीप जलाकर, लाल पुष्प अर्पित कर और देवी के मन्त्र का जप या सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ कर संधि पूजा की जाती है। कई क्षेत्रों में इस समय प्रतीकात्मक बलि के रूप में कुम्हड़ा, केला या खीरा अर्पित किया जाता है।
संक्षेप में विधि
संधि काल से पहले स्नान कर पूजा स्थान तैयार करें और 108 दीप व पुष्प सजा लें। संधि काल आरंभ होते ही दीप जलाएं, मां चामुण्डा का ध्यान कर 108 कमल या लाल पुष्प अर्पित करें, मन्त्र जप या सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ करें, और काल पूरा होने से पहले भोग अर्पित कर आरती करें।
संधि पूजा मुहूर्त 2026
समय नई दिल्ली के अनुसार। इसी दिन अष्टमी और नवमी दोनों हैं, इसलिए कन्या पूजन और हवन भी इसी दिन किए जाएंगे।
संधि पूजा की सामग्री
- 108 मिट्टी के दीप, घी या तेल और बत्ती
- 108 कमल या लाल पुष्प
- लाल चुनरी
- रोली, अक्षत, सिंदूर
- धूप और कपूर
- भोग के लिए फल व मिठाई
- जप के लिए रुद्राक्ष या लाल चन्दन की माला
- दुर्गा सप्तशती
संधि पूजा विधि
पूरी तैयारी संधि काल से पहले कर लें, ताकि 48 मिनट पूजा में ही लगें।
- १
पहले से तैयारी
स्नान कर पूजा स्थान शुद्ध करें। 108 दीपों में घी या तेल भरकर बत्ती लगा लें, और 108 पुष्प गिनकर थाली में रख लें।
- २
संकल्प और ध्यान
संधि काल आरंभ होते ही हाथ में जल लेकर संकल्प करें और मां चामुण्डा का ध्यान करें।
- ३
108 दीप जलाएं
एक-एक कर 108 दीप प्रज्वलित करें। परिवार के सदस्य मिलकर दीप जला सकते हैं, ताकि समय पर सब जल जाएं।
- ४
108 पुष्प अर्पित करें
देवी को चुनरी, सिंदूर, रोली और अक्षत चढ़ाएं, फिर 108 कमल या लाल पुष्प एक-एक कर अर्पित करें।
- ५
जप या पाठ
नवार्ण मन्त्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जप करें, या दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय (चण्ड-मुण्ड वध) का पाठ करें।
- ६
भोग और आरती
संधि काल पूरा होने से पहले फल व मिठाई का भोग अर्पित करें और कपूर से आरती कर क्षमा प्रार्थना करें।
संधि पूजा के बारे में
संधि पूजा अष्टमी और नवमी के 48 मिनट के संधि काल में मां चामुण्डा की पूजा है, जो बंगाल की दुर्गा पूजा और उत्तर भारत की दुर्गा अष्टमी, दोनों में की जाती है। इस पृष्ठ पर 2026 का मुहूर्त, इसका महत्व, सामग्री और विधि दी गई है।
सामान्य प्रश्न
2026 में संधि पूजा कब है?
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:27 से 11:15 तक। अष्टमी तिथि 10:51 पर समाप्त होगी, यह समय उसके 24 मिनट पहले से 24 मिनट बाद तक है।
संधि पूजा 48 मिनट की ही क्यों होती है?
संधि काल दो घटी का माना जाता है: अष्टमी की अन्तिम एक घटी और नवमी की पहली एक घटी। एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है, इसलिए कुल समय लगभग 48 मिनट होता है।
क्या घर पर संधि पूजा कर सकते हैं?
हां। संधि काल में दीप जलाकर, लाल पुष्प अर्पित कर और मां चामुण्डा के मन्त्र का जप या सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ कर घर पर भी संधि पूजा की जाती है। 108 दीप न हों तो श्रद्धा अनुसार जितने हो सकें।