2026 में अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं: अष्टमी तिथि प्रातः 10:51 तक है, उसके बाद नवमी। 2027 में अष्टमी 7 और नवमी 8 अक्टूबर को है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी-नवमी को भी इसी विधि से कन्या पूजन होता है।
कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि में देवी की पूजा प्रतिमा और कलश के साथ-साथ छोटी कन्याओं में भी की जाती है, क्योंकि उन्हें देवी का जीवित रूप माना जाता है। नौ दिनों की उपासना का समापन इन्हीं कन्याओं को पूजकर और भोजन कराकर होता है।
परंपरा में दो से दस वर्ष की आयु की कन्याओं को देवी के नौ रूप माना गया है: दो वर्ष की कुमारिका, तीन की त्रिमूर्ति, चार की कल्याणी, पांच की रोहिणी, छह की कालिका, सात की चण्डिका, आठ की शाम्भवी, नौ की दुर्गा और दस वर्ष की सुभद्रा।
कन्याओं के साथ एक बालक को भी आमंत्रित किया जाता है, जिसे भैरव (कई क्षेत्रों में लांगुर) का रूप मानकर पूजा जाता है। देवी के साथ भैरव की पूजा के बिना देवी की उपासना अधूरी मानी जाती है।
कन्या पूजन कैसे करें
कन्याओं को एक दिन पहले या उसी सुबह आदर से आमंत्रित किया जाता है। घर आने पर उनके पैर धोकर, उन्हें आसन पर बैठाकर तिलक और कलावा किया जाता है, फिर हलवा, पूरी और चने का भोग खिलाया जाता है।
भोजन के बाद उन्हें चुनरी, फल, उपहार या दक्षिणा देकर, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है और विदा किया जाता है। इसके बाद ही अनेक परिवार नवरात्रि के व्रत का पारण करते हैं।
संक्षेप में विधि
कन्याओं के पैर धोकर आसन पर बैठाएं, तिलक लगाकर कलावा बांधें और चुनरी ओढ़ाएं। देवी का ध्यान कर उन्हें हलवा, पूरी और चने का भोग खिलाएं, फिर फल, उपहार व दक्षिणा देकर पैर छूकर आशीर्वाद लें और विदा करें। उसके बाद व्रत का पारण करें।
कन्या पूजन 2026
जो परिवार अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे प्रातः 10:51 से पहले पूजन कर सकते हैं; नवमी वाले उसके बाद। संधि पूजा का समय इसी के बीच, लगभग 10:27 से 11:15 तक है। समय नई दिल्ली के अनुसार।
कन्याओं की आयु और उनके रूप
कन्या पूजन की सामग्री
- पैर धोने के लिए जल व स्वच्छ कपड़ा
- बैठने के लिए आसन
- रोली या कुमकुम, अक्षत
- कलावा (मौली)
- लाल चुनरी
- पुष्प
- हलवा, पूरी और काले चने
- फल व मिठाई
- उपहार और दक्षिणा
- दीपक और धूप
कन्या पूजन विधि
सुबह देवी की पूजा कर लें, भोग तैयार रखें, फिर कन्याओं के आने पर क्रम से ये चरण करें।
- १
आमंत्रण और स्वागत
कन्याओं और एक बालक को आदर से आमंत्रित करें। घर आने पर उनका स्वागत करें और 'देवी पधारी हैं' इस भाव से उन्हें भीतर लाएं।
- २
पैर धोएं और आसन दें
थाली में उनके पैर जल से धोकर स्वच्छ कपड़े से पोंछें, फिर उन्हें आसन पर बैठाएं।
- ३
तिलक, कलावा और चुनरी
रोली और अक्षत से तिलक लगाएं, दाहिने हाथ में कलावा बांधें, चुनरी ओढ़ाएं और पुष्प अर्पित करें। बालक को भी तिलक कर कलावा बांधें।
- ४
दीप और आरती
दीपक जलाकर देवी का ध्यान करें और कन्याओं की आरती उतारें।
- ५
भोग कराएं
हलवा, पूरी और काले चने का भोग प्रेम से परोसें और उन्हें भरपेट खिलाएं।
- ६
उपहार और दक्षिणा
भोजन के बाद फल, उपहार और दक्षिणा दें।
- ७
आशीर्वाद और विदाई
उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और आदर से विदा करें। इसके बाद व्रत का पारण करें।
कन्या पूजन के बारे में
कन्या पूजन, जिसे कंजक या कुमारी पूजा भी कहते हैं, नवरात्रि की अष्टमी या नवमी का प्रमुख अनुष्ठान है। इस पृष्ठ पर 2026 का समय, कन्याओं की आयु और उनके नौ रूप, सामग्री और पूरी विधि दी गई है।
सामान्य प्रश्न
2026 में कन्या पूजन कब करें?
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को। अष्टमी को पूजन करने वाले प्रातः 10:51 से पहले, और नवमी को पूजन करने वाले उसके बाद कन्या पूजन कर सकते हैं।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है; दोनों ही मान्य हैं। कई परिवार अष्टमी को और कई नवमी को कन्या पूजन करते हैं।
अगर नौ कन्याएं न मिलें तो?
नौ कन्याओं का पूजन श्रेष्ठ माना जाता है, पर जितनी कन्याएं मिलें, उन्हीं का श्रद्धा से पूजन किया जा सकता है। परंपरा में एक कन्या के पूजन का भी विधान है।
कन्या पूजन में बालक को क्यों बुलाते हैं?
बालक को भैरव (कई जगह लांगुर) का रूप माना जाता है, जो देवी के रक्षक हैं। देवी के साथ उनकी पूजा से कन्या पूजन पूर्ण माना जाता है।
