
नवरात्रि का पांचवां दिन, गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026, मां स्कंदमाता को समर्पित है। आज उन्हें केला का भोग लगता है, और सात दिनों के क्रम से सप्तशती पढ़ने वालों के लिए आज अध्याय 9 (निशुम्भ वध), अध्याय 10 (शुम्भ वध) का पाठ है।
आज का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल पंचमी, 16 अक्टूबर रात 3:25 तक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- प्रातः 6:21 / शाम 5:51
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 11:43 से 12:29
- राहुकाल
- दोपहर 1:33 से 2:59
पूजा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल में करना सबसे अच्छा माना जाता है। राहुकाल (दोपहर 1:33 से 2:59) में कोई नया शुभ कार्य आरंभ न करने की परंपरा है, जबकि अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
मां स्कंदमाता कौन हैं
स्कंदमाता भगवान स्कंद, यानी कार्तिकेय, की माता हैं, जिन्होंने देवताओं के सेनापति बनकर तारकासुर का वध किया। देवी की गोद में बाल स्कंद विराजते हैं, इसलिए उनकी पूजा से स्कंद की पूजा भी हो जाती है। वे कमल पर भी बैठती हैं, इसलिए पद्मासना भी कहलाती हैं।
स्कंदमाता मातृत्व का रूप हैं: गोद में बैठे बाल स्कंद दिखाते हैं कि जो शक्ति असुरों का संहार करती है, वही अपने भक्तों को मां की तरह संभालती भी है। इसीलिए संतान की कामना और संतान के कल्याण के लिए आज विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि उनकी उपासना से भगवान कार्तिकेय की उपासना का फल भी मिल जाता है, और यह विशेषता केवल इसी स्वरूप में है। उनका वर्ण शुभ्र बताया गया है, उनसे जुड़ा ग्रह बुध माना जाता है, और वे ज्ञान व मोक्ष का वर देने वाली मानी जाती हैं।
- वाहन
- सिंह
- स्वरूप
- चार भुजाएं, ऊपर के दोनों हाथों में कमल, एक हाथ में बाल स्कंद और एक हाथ अभय मुद्रा में
- भोग
- केला
- प्रिय पुष्प
- लाल रंग के पुष्प
- ग्रह (मान्यता)
- बुध
आज की पूजा कैसे करें
प्रातः स्नान कर कलश और अखंड ज्योति की पूजा करें, फिर नीचे दी गई प्रार्थना से मां स्कंदमाता का ध्यान करें। उन्हें लाल रंग के पुष्प और केला का भोग अर्पित करें, मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें, स्तुति पढ़ें और संध्या को आरती करें। व्रत रखने वाले दिन में फलाहार लेते हैं।
ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का दुर्गा सप्तशती पाठ
जो भक्त सप्तशती का पाठ सात दिनों के क्रम से कर रहे हैं, उनके लिए आज अध्याय 9 (निशुम्भ वध), अध्याय 10 (शुम्भ वध) का पाठ है। कवच, अर्गला और कीलक के बाद ये अध्याय पढ़ें।
नौवें अध्याय में रक्तबीज की मृत्यु से क्रोधित निशुम्भ युद्ध में उतरता है और देवी के हाथों मारा जाता है। दसवें अध्याय में शुम्भ देवी पर ताना मारता है कि वे दूसरों के बल पर लड़ रही हैं। तब देवी सभी मातृकाओं को अपने भीतर समेट लेती हैं और कहती हैं कि इस संसार में वे अकेली ही हैं, उनके सिवा दूसरा कोई नहीं। फिर आकाश में लंबे युद्ध के बाद शुम्भ का वध होता है, और देवताओं का संकट समाप्त होता है।
कल का दिन
कल, शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026, नवरात्रि का छठा दिन है और मां कात्यायनी की पूजा होगी, जिन्हें शहद का भोग लगता है। सात दिनों के क्रम में कल अध्याय 11 का पाठ है।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।



