
नवरात्रि का चौथा दिन, बुधवार, 14 अक्टूबर 2026, मां कूष्माण्डा को समर्पित है। आज उन्हें मालपुआ का भोग लगता है, और सात दिनों के क्रम से सप्तशती पढ़ने वालों के लिए आज अध्याय 5 (देवताओं द्वारा स्तुति व शुम्भ के दूत का संवाद), अध्याय 6 (धूम्रलोचन वध), अध्याय 7 (चण्ड-मुण्ड वध), अध्याय 8 (रक्तबीज वध) का पाठ है।
आज का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी, 15 अक्टूबर रात 1:13 तक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- प्रातः 6:21 / शाम 5:52
- राहुकाल
- दोपहर 12:07 से 1:33
पूजा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल में करना सबसे अच्छा माना जाता है। राहुकाल (दोपहर 12:07 से 1:33) में कोई नया शुभ कार्य आरंभ न करने की परंपरा है। बुधवार होने के कारण आज अभिजित मुहूर्त नहीं माना जाता।
मां कूष्माण्डा कौन हैं
मान्यता है कि जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्माण्ड को रचा। इसीलिए वे सृष्टि की आदि शक्ति कहलाती हैं और उनका वास सूर्य मंडल के भीतर माना जाता है। आठ भुजाओं के कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं।
उनके नाम की एक प्रचलित व्याख्या है: 'कु' यानी थोड़ा, 'ऊष्मा' यानी ऊर्जा और 'अण्ड' यानी ब्रह्माण्ड, अर्थात जिनकी थोड़ी-सी ऊर्जा से ब्रह्माण्ड बना। दूसरी व्याख्या कूष्माण्ड, यानी सफ़ेद कद्दू, से जुड़ी है, जो उन्हें प्रिय माना जाता है। सूर्य के भीतर वास के कारण उनका ग्रह सूर्य माना जाता है, और मान्यता है कि वे बुद्धि, निर्णय की क्षमता और आरोग्य का वर देती हैं। उनके एक हाथ में अमृत से भरा कलश है, जो जीवन देने वाली शक्ति का प्रतीक है।
- वाहन
- सिंह
- स्वरूप
- आठ भुजाएं, जिनमें कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, अमृत-कलश, जपमाला, गदा व चक्र
- भोग
- मालपुआ
- प्रिय पुष्प
- लाल रंग के पुष्प
- ग्रह (मान्यता)
- सूर्य
आज की पूजा कैसे करें
प्रातः स्नान कर कलश और अखंड ज्योति की पूजा करें, फिर नीचे दी गई प्रार्थना से मां कूष्माण्डा का ध्यान करें। उन्हें लाल रंग के पुष्प और मालपुआ का भोग अर्पित करें, मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें, स्तुति पढ़ें और संध्या को आरती करें। व्रत रखने वाले दिन में फलाहार लेते हैं।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का दुर्गा सप्तशती पाठ
जो भक्त सप्तशती का पाठ सात दिनों के क्रम से कर रहे हैं, उनके लिए आज अध्याय 5 (देवताओं द्वारा स्तुति व शुम्भ के दूत का संवाद), अध्याय 6 (धूम्रलोचन वध), अध्याय 7 (चण्ड-मुण्ड वध), अध्याय 8 (रक्तबीज वध) का पाठ है। कवच, अर्गला और कीलक के बाद ये अध्याय पढ़ें।
आज चार अध्याय पढ़े जाते हैं, और पांचवें से उत्तम चरित्र आरंभ होता है, जिसकी अधिष्ठात्री महासरस्वती हैं। शुम्भ-निशुम्भ से पीड़ित देवता हिमालय पर 'या देवी सर्वभूतेषु' वाली स्तुति करते हैं, और पार्वती के शरीर से अम्बिका प्रकट होती हैं। शुम्भ का दूत विवाह का प्रस्ताव लाता है, जिसे देवी यह कहकर लौटाती हैं कि जो उन्हें युद्ध में जीतेगा, वही उनका पति होगा। छठे अध्याय में धूम्रलोचन, सातवें में चण्ड-मुण्ड और आठवें में रक्तबीज का वध है, जिसके रक्त की हर बूंद से नया असुर जन्म लेता था।
कल का दिन
कल, गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026, नवरात्रि का पांचवां दिन है और मां स्कंदमाता की पूजा होगी, जिन्हें केला का भोग लगता है। सात दिनों के क्रम में कल अध्याय 9, अध्याय 10 का पाठ है।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।



