
नवरात्रि का दूसरा दिन, सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। आज उन्हें चीनी अथवा मिश्री का भोग लगता है, और सात दिनों के क्रम से सप्तशती पढ़ने वालों के लिए आज अध्याय 2 (महिषासुर की सेना का वध), अध्याय 3 (सेनापतियों सहित महिषासुर वध) का पाठ है।
आज का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया, रात 10:13 तक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- प्रातः 6:20 / शाम 5:54
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 11:44 से 12:30
- राहुकाल
- प्रातः 7:46 से 9:13
पूजा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल में करना सबसे अच्छा माना जाता है। राहुकाल (प्रातः 7:46 से 9:13) में कोई नया शुभ कार्य आरंभ न करने की परंपरा है, जबकि अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी कौन हैं
ब्रह्मचारिणी पार्वती जी का तपस्या करने वाला रूप हैं। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने हज़ारों वर्ष कठोर तप किया, कभी केवल फल, फिर केवल पत्ते खाकर, और अंत में पत्ते भी त्याग दिए, इसीलिए वे अपर्णा भी कहलाईं। उनकी पूजा धैर्य, संयम और लक्ष्य पर टिके रहने की शक्ति के लिए की जाती है।
उनके नाम में 'ब्रह्म' का अर्थ तप है और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली, यानी तप का आचरण करने वाली देवी। उनकी कथा धैर्य की सीख देती है: फल की चिंता किए बिना वर्षों तक एक लक्ष्य पर टिके रहना। इसीलिए विद्यार्थी और कोई कठिन संकल्प लेने वाले इस दिन विशेष रूप से उनकी उपासना करते हैं। उनके हाथ की जपमाला साधना और कमण्डलु त्याग का प्रतीक है, और मान्यता है कि मंगल ग्रह से जुड़े कष्टों में भी उनकी पूजा से शांति मिलती है।
- वाहन
- कोई वाहन नहीं, नंगे पांव चलती हुई
- स्वरूप
- दो भुजाएं, दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमण्डलु
- भोग
- चीनी अथवा मिश्री
- प्रिय पुष्प
- चमेली
- ग्रह (मान्यता)
- मंगल
आज की पूजा कैसे करें
प्रातः स्नान कर कलश और अखंड ज्योति की पूजा करें, फिर नीचे दी गई प्रार्थना से मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें। उन्हें चमेली और चीनी अथवा मिश्री का भोग अर्पित करें, मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें, स्तुति पढ़ें और संध्या को आरती करें। व्रत रखने वाले दिन में फलाहार लेते हैं।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का दुर्गा सप्तशती पाठ
जो भक्त सप्तशती का पाठ सात दिनों के क्रम से कर रहे हैं, उनके लिए आज अध्याय 2 (महिषासुर की सेना का वध), अध्याय 3 (सेनापतियों सहित महिषासुर वध) का पाठ है। कवच, अर्गला और कीलक के बाद ये अध्याय पढ़ें।
दूसरे अध्याय से मध्यम चरित्र आरंभ होता है, जिसकी अधिष्ठात्री महालक्ष्मी हैं। महिषासुर से हारे देवता ब्रह्मा जी के साथ शिव और विष्णु के पास जाते हैं, और सब देवताओं के क्रोध से निकले तेज से एक देवी प्रकट होती हैं। देवता उन्हें अपने-अपने अस्त्र और आभूषण देते हैं, और देवी महिषासुर की विशाल सेना का संहार करती हैं। तीसरे अध्याय में चिक्षुर, चामर और बिडाल जैसे सेनापतियों के बाद स्वयं महिषासुर का वध होता है, जो भैंसे, सिंह, मनुष्य और हाथी के रूप बदलकर लड़ता है।
कल का दिन
कल, मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026, नवरात्रि का तीसरा दिन है और मां चंद्रघंटा की पूजा होगी, जिन्हें दूध व दूध से बने व्यंजन का भोग लगता है। सात दिनों के क्रम में कल अध्याय 4 का पाठ है।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।

