मां ब्रह्मचारिणी
मां ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का द्वितीय स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन, शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होती है। देवी कवच में नौ स्वरूपों के क्रम में उनका नाम दूसरे स्थान पर आता है।

मां ब्रह्मचारिणी माहात्म्य
ब्रह्मचारिणी देवी का अविवाहित, तपस्विनी रूप हैं। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तप किया, इसी से वे ब्रह्मचारिणी कहलाईं। मान्यता है कि इस तप में उन्होंने हजार वर्ष केवल फल-फूल और सौ वर्ष केवल शाक खाकर, भूमि पर सोकर बिताए।
वे नंगे पांव चलती हुई दिखाई जाती हैं, दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमण्डलु लिए। उनकी प्रार्थना में भी यही है, 'दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू', यानी कमल जैसे हाथों में अक्षमाला और कमण्डलु धारण करने वाली।
मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्त को तप, त्याग व संयम की शक्ति का आशीर्वाद मिलता है, और मंगल ग्रह से जुड़े कष्टों में भी शांति मिलती है। उन्हें चीनी अथवा मिश्री का भोग प्रिय है, और उनका प्रिय पुष्प चमेली माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी: मंत्र, प्रार्थना व स्तुति
मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
प्रार्थना (ध्यान)
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
देवी कवच में नवदुर्गा (श्लोक ३-५) →
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
मां ब्रह्मचारिणी से जुड़े पाठ
आज का सप्तशती पाठ (दिन 2)
पर्व एवं व्रत
चालीसा, आरती व कथा
मां ब्रह्मचारिणी के बारे में
नवरात्रि के दूसरे दिन प्रातः स्नान के बाद कलश के समक्ष मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान ऊपर दी गई प्रार्थना से करें, मंत्र का जप करें और भोग अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती के सात-दिवसीय पाठ-क्रम में नवरात्रि के दूसरे दिन द्वितीय अध्याय (महिषासुर की सेना का वध), तृतीय अध्याय (सेनापतियों सहित महिषासुर वध) पढ़ा जाता है।
सामान्य प्रश्न
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा किस दिन होती है?
नवरात्रि के दूसरे दिन, यानी चैत्र और आश्विन (शारदीय) दोनों नवरात्रियों में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र क्या है?
उनका मंत्र है "ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः"। साथ ही 'या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता' स्तुति का पाठ किया जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का वाहन और स्वरूप कैसा है?
वाहन: कोई वाहन नहीं, नंगे पांव चलती हुई। स्वरूप: दो भुजाएं, दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमण्डलु।
नवरात्रि के दूसरे दिन दुर्गा सप्तशती का कौन-सा पाठ करें?
दुर्गा सप्तशती के सात-दिवसीय पाठ-क्रम में नवरात्रि के दूसरे दिन द्वितीय अध्याय (महिषासुर की सेना का वध), तृतीय अध्याय (सेनापतियों सहित महिषासुर वध) पढ़ा जाता है।