चैत्र नवरात्रि
चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष के आरंभ में मनाई जाने वाली नौ दिन की उपासना है, जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तिथि, अर्थात राम नवमी तक चलती है।

चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि से ही हिंदू नववर्ष अर्थात विक्रम संवत का आरंभ भी माना जाता है, तथा इसी दिन से गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र) व उगादि (आंध्र-कर्नाटक) भी मनाए जाते हैं। घटस्थापना का सटीक मुहूर्त शहर अनुसार बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें।
चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में मनाई जाती है, इसीलिए इसे 'वासंतिक नवरात्रि' भी कहा जाता है। यह वर्ष की चार नवरात्रियों में से एक है, और चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष के आरंभ के साथ ही शुरू होती है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी।
शारदीय नवरात्रि की भांति, चैत्र नवरात्रि में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, की क्रमशः पूजा की जाती है, तथा घटस्थापना कर अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है।
चैत्र नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन, नवमी तिथि, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव 'राम नवमी' के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए चैत्र नवरात्रि केवल मां दुर्गा की उपासना का ही नहीं, अपितु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के स्मरण का भी पर्व है।
नवरात्रि के नौ स्वरूप
मां शैलपुत्री
दिन 1मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः
भोग: शुद्ध गाय का घी · स्वास्थ्य, स्थिरता व दीर्घायु
मां ब्रह्मचारिणी
दिन 2मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः
भोग: चीनी अथवा मिश्री · तप, त्याग व संयम की शक्ति
मां चंद्रघंटा
दिन 3मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः
भोग: दूध व दूध से बने व्यंजन · साहस, वीरता व भय से मुक्ति
मां कूष्मांडा
दिन 4मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं देव्यै नमः
भोग: मालपुआ · बुद्धि, निर्णय-क्षमता व आरोग्य
मां स्कंदमाता
दिन 5मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः
भोग: केला · ज्ञान, संतान सुख व मोक्ष
मां कात्यायनी
दिन 6मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
भोग: शहद · विवाह में बाधा दूर व आकर्षण
मां कालरात्रि
दिन 7मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः
भोग: गुड़ · भय व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
मां महागौरी
दिन 8मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
भोग: नारियल · सुख-समृद्धि व मनोकामना पूर्ति
मां सिद्धिदात्री
दिन 9मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
भोग: तिल · सिद्धियों की प्राप्ति व पूर्ण ज्ञान
चैत्र नवरात्रि कैसे मनाई जाती है
पहले दिन घटस्थापना की जाती है, मिट्टी के पात्र में जौ बोकर, जल से भरे कलश पर आम के पत्ते व नारियल रखकर मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है, तथा घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है।
प्रतिदिन मां के संबंधित स्वरूप की पूजा व दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है। महाराष्ट्र में इसी प्रतिपदा को 'गुड़ी पड़वा' के रूप में घर के द्वार पर गुड़ी सजाई जाती है, तथा आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में 'उगादि' मनाया जाता है।
नौवें दिन नवमी को घर-घर में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का उत्सव मनाया जाता है, कन्या पूजन किया जाता है, तथा हवन कर नौ दिनों की पूजा का समापन होता है।
चैत्र नवरात्रि पूजा विधि
प्रतिपदा तिथि को प्रातःकाल स्नान कर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आवाहन करें, तथा अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। प्रतिदिन उस दिन के स्वरूप का ध्यान व दुर्गा चालीसा का पाठ करें। नवें दिन कन्या पूजन व हवन कर, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव सहित पूजा का समापन करें।
चैत्र नवरात्रि के बारे में
चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का पर्व है, जो हिंदू नववर्ष के साथ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तिथि, अर्थात राम नवमी तक चलता है। इस पृष्ठ पर इसका महत्व, घटस्थापना, नवदुर्गा के नौ स्वरूप, तथा गुड़ी पड़वा व उगादि जैसी संबंधित परंपराओं की जानकारी दी गई है।
इसके नौवें व समापन दिवस, राम नवमी, की विस्तृत जानकारी हेतु उसका अलग पृष्ठ भी उपलब्ध है। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
चैत्र नवरात्रि कब मनाई जाती है?
चैत्र नवरात्रि प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक, नौ दिनों के लिए मनाई जाती है, जो सामान्यतः मार्च-अप्रैल में आती है।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है?
चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में चैत्र मास में मनाई जाती है और राम नवमी पर समाप्त होती है, जबकि शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आश्विन मास में मनाई जाती है और दशहरे पर समाप्त होती है। दोनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा होती है।
चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष से कैसे जुड़ी है?
चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि से ही विक्रम संवत, अर्थात हिंदू नववर्ष, का आरंभ माना जाता है, तथा इसी दिन गुड़ी पड़वा व उगादि भी मनाए जाते हैं।
चैत्र नवरात्रि किस दिन समाप्त होती है?
चैत्र नवरात्रि नवें दिन, नवमी तिथि को समाप्त होती है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव 'राम नवमी' के रूप में मनाया जाता है।