
नवरात्रि का छठा दिन, शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026, मां कात्यायनी को समर्पित है। आज उन्हें शहद का भोग लगता है, और सात दिनों के क्रम से सप्तशती पढ़ने वालों के लिए आज अध्याय 11 (देवताओं द्वारा नारायणी स्तुति व देवी का वरदान) का पाठ है।
आज का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी, 17 अक्टूबर प्रातः 5:54 तक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- प्रातः 6:22 / शाम 5:50
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 11:43 से 12:29
- राहुकाल
- प्रातः 10:40 से दोपहर 12:06
पूजा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल में करना सबसे अच्छा माना जाता है। राहुकाल (प्रातः 10:40 से दोपहर 12:06) में कोई नया शुभ कार्य आरंभ न करने की परंपरा है, जबकि अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
मां कात्यायनी कौन हैं
मां कात्यायनी ऋषि कात्य के घर प्रकट हुईं, इसलिए यह नाम पड़ा, और उन्होंने ही महिषासुर का वध किया। भागवत पुराण में ब्रज की गोपियां श्रीकृष्ण को पाने के लिए कात्यायनी व्रत करती हैं, इसीलिए अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी उनकी पूजा की जाती है।
कात्यायनी देवी का योद्धा रूप हैं, इसलिए वे महिषासुरमर्दिनी भी कहलाती हैं, और दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में देवता उनकी स्तुति 'कात्यायनी' नाम से ही करते हैं। ब्रज में उनकी उपासना विशेष है: भागवत पुराण के अनुसार गोपियां मार्गशीर्ष मास में यमुना तट पर बालू की प्रतिमा बनाकर उनका व्रत करती थीं। इसी कारण विवाह में देरी या बाधा होने पर अविवाहित कन्याएं आज विशेष रूप से उनकी पूजा करती हैं। उनसे जुड़ा ग्रह बृहस्पति माना जाता है।
- वाहन
- सिंह
- स्वरूप
- चार भुजाएं, बाएं हाथों में कमल व तलवार, दाहिने हाथ अभय व वरद मुद्रा में
- भोग
- शहद
- प्रिय पुष्प
- लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुलाब
- ग्रह (मान्यता)
- बृहस्पति
आज की पूजा कैसे करें
प्रातः स्नान कर कलश और अखंड ज्योति की पूजा करें, फिर नीचे दी गई प्रार्थना से मां कात्यायनी का ध्यान करें। उन्हें लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुलाब और शहद का भोग अर्पित करें, मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें, स्तुति पढ़ें और संध्या को आरती करें। व्रत रखने वाले दिन में फलाहार लेते हैं।
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का दुर्गा सप्तशती पाठ
जो भक्त सप्तशती का पाठ सात दिनों के क्रम से कर रहे हैं, उनके लिए आज अध्याय 11 (देवताओं द्वारा नारायणी स्तुति व देवी का वरदान) का पाठ है। कवच, अर्गला और कीलक के बाद ये अध्याय पढ़ें।
ग्यारहवां अध्याय शुम्भ वध के बाद देवताओं की नारायणी स्तुति है, जिसका प्रसिद्ध श्लोक 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके' है। स्तुति से प्रसन्न देवी वर देती हैं और आगे के अपने अवतार बताती हैं: नंद के घर जन्म लेकर विंध्याचल में वास, रक्तदन्तिका, सौ वर्षों के अकाल में शताक्षी और शाकम्भरी, दुर्गम असुर का वध कर दुर्गा, फिर भीमा और भ्रामरी। वे वचन देती हैं कि जब-जब दानवों से बाधा होगी, तब-तब वे अवतार लेकर शत्रुओं का नाश करेंगी।
कल का दिन
कल, शनिवार, 17 अक्टूबर 2026, नवरात्रि का सातवां दिन है और मां कालरात्रि की पूजा होगी, जिन्हें गुड़ का भोग लगता है। सात दिनों के क्रम में कल अध्याय 12, अध्याय 13 का पाठ है।
तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।



