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महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी

मां कात्यायनी

मां कात्यायनी नवदुर्गा का षष्ठ स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है। देवी कवच में नौ स्वरूपों के क्रम में उनका नाम छठे स्थान पर आता है।

मां कात्यायनी

मां कात्यायनी माहात्म्य

महिषासुर का संहार करने के लिए देवी ने कात्यायनी रूप धारण किया, इसलिए यह उनका योद्धा रूप माना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार वे ऋषि कात्य के घर प्रकट हुईं, इसी से कात्यायनी कहलाईं। दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में देवता उनकी स्तुति 'कात्यायनी' नाम से करते हैं।

वे भव्य सिंह पर आरूढ़ हैं और उनकी चार भुजाएं हैं: बाएं हाथों में कमल और तलवार, दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में। उनकी प्रार्थना में भी 'चन्द्रहासोज्ज्वलकरा', यानी हाथ में चमकती चन्द्रहास तलवार, का वर्णन है।

मान्यता है कि मां कात्यायनी की उपासना से भक्त को विवाह में आने वाली बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है, और बृहस्पति ग्रह से जुड़े कष्टों में भी शांति मिलती है। उन्हें शहद का भोग प्रिय है, और उनका प्रिय पुष्प लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुलाब माना जाता है।

मां कात्यायनी: मंत्र, प्रार्थना व स्तुति

मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

प्रार्थना (ध्यान)

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी कवच में नवदुर्गा (श्लोक ३-५) →

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।

मां कात्यायनी से जुड़े पाठ

मां कात्यायनी के बारे में

नवरात्रि के छठे दिन प्रातः स्नान के बाद कलश के समक्ष मां कात्यायनी का ध्यान ऊपर दी गई प्रार्थना से करें, मंत्र का जप करें और भोग अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती के सात-दिवसीय पाठ-क्रम में नवरात्रि के छठे दिन एकादश अध्याय (देवताओं द्वारा नारायणी स्तुति व देवी का वरदान) पढ़ा जाता है।

सामान्य प्रश्न

मां कात्यायनी की पूजा किस दिन होती है?

नवरात्रि के छठे दिन, यानी चैत्र और आश्विन (शारदीय) दोनों नवरात्रियों में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को।

मां कात्यायनी का मंत्र क्या है?

उनका मंत्र है "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"। साथ ही 'या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता' स्तुति का पाठ किया जाता है।

मां कात्यायनी का वाहन और स्वरूप कैसा है?

वाहन: सिंह। स्वरूप: चार भुजाएं, बाएं हाथों में कमल व तलवार, दाहिने हाथ अभय व वरद मुद्रा में।

नवरात्रि के छठे दिन दुर्गा सप्तशती का कौन-सा पाठ करें?

दुर्गा सप्तशती के सात-दिवसीय पाठ-क्रम में नवरात्रि के छठे दिन एकादश अध्याय (देवताओं द्वारा नारायणी स्तुति व देवी का वरदान) पढ़ा जाता है।

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मुख्य जानकारी

नवरात्रि में पूजाछठे दिन, शुक्ल षष्ठी
नवरात्रि 2026शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026
नवरात्रि 2027मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027
वाहनसिंह
स्वरूपचार भुजाएं, बाएं हाथों में कमल व तलवार, दाहिने हाथ अभय व वरद मुद्रा में
अन्य नाममहिषासुरमर्दिनी
ग्रह (मान्यता)बृहस्पति
प्रिय पुष्पलाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुलाब
भोगशहद
मंत्रॐ देवी कात्यायन्यै नमः