मुख्यआरतीश्री एकादशी माता आरती

श्री एकादशी माता आरती

एकादशी माता आरती, ॐ जय एकादशी माता, वर्षभर की चौबीस एकादशियों की महिमा बताने वाली सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

कड़ी/१४

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · १३ कड़ी
पाठ समय५ मिनट
स्थायी

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

कड़ी

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया कहावै, विजय सदा पावै॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में, शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी, अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा, आनन्द से रहिए॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्विन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती, पार करो नैया॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी, दुख दारिद्र हरनी॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

काउंटर

व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।

लक्ष्य चुनें
/ ११

श्री एकादशी माता आरती पाठ विधि

एकादशी के दिन विष्णु-पूजन के पश्चात दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'ॐ जय एकादशी माता' दोहराएं।

पाठ दिवस
प्रत्येक एकादशी
आगे पढ़ें · Next
ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · ४ मिनट
पाठ खोलें →

श्री एकादशी माता आरती के बारे में

एकादशी माता आरती वर्षभर आने वाली चौबीस एकादशियों की महिमा बताने वाली सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसमें प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम और उसका फल बताया गया है। आरती एक स्थायी पंक्ति और तेरह कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। इसमें वर्षभर में आने वाली चौबीस एकादशियों, मार्गशीर्ष से लेकर कार्तिक मास तक, तथा अधिक मास की दो अतिरिक्त एकादशियों, के नामों और महिमा का वर्णन है। यह आरती प्रत्येक एकादशी व्रत के दिन भक्तों द्वारा गाई जाती है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

एकादशी माता आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और तेरह कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

एक वर्ष में कुल कितनी एकादशियां होती हैं?

सामान्यतः एक वर्ष में चौबीस एकादशियां होती हैं, बारह मास में दो-दो। अधिक मास वाले वर्ष में दो अतिरिक्त एकादशियां, परमा और पद्मिनी, भी आती हैं।

एकादशी माता आरती पाठ का उत्तम समय क्या है?

एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पूजन के पश्चात, दीप जलाकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

संबंधित खोज