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विष्णु के करवट बदलने का दिन · भाद्रपद शुक्ल एकादशी

परिवर्तिनी एकादशी

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जिसे पद्मा, पार्श्व, जलझूलनी या वामन एकादशी भी कहते हैं। परंपरा में माना जाता है कि चातुर्मास के शयन में भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं।

परिवर्तिनी एकादशी
अगली तिथि
११ सितंबर २०२७

यह एकादशी गणेश चतुर्थी के बाद और अनंत चतुर्दशी से पहले आती है। पद्म पुराण में इसका नाम पद्मा एकादशी है।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में ब्रह्मा जी नारद जी को बताते हैं कि भाद्रपद शुक्ल की यह एकादशी पद्मा नाम से प्रसिद्ध है, इस दिन भगवान हृषीकेश की पूजा होती है, और यह सब सिद्धियां देने वाली और सब उपद्रवों का नाश करने वाली है। इसकी कथा पढ़ने-सुनने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है।

परिवर्तिनी (पद्मा) एकादशी व्रत कथा
कथा · राजा मांधाता और अकाल की पूरी कथा

कथा के अनुसार सूर्यवंशी धर्मात्मा राजा मांधाता के राज्य में तीन वर्ष वर्षा नहीं हुई और प्रजा भूख से पीड़ित हो गई। उपाय खोजते हुए राजा वन में अंगिरा ऋषि के पास पहुंचे। ऋषि ने अकाल का एक कारण बताया, पर उस उपाय में एक निरपराध तपस्वी की हत्या होती, इसलिए राजा ने उसे ठुकराकर धर्म का कोई उपाय पूछा।

तब ऋषि ने उन्हें भाद्रपद शुक्ल की पद्मा एकादशी का व्रत बताया। राजा ने चारों वर्णों की सारी प्रजा के साथ यह व्रत किया, बादल बरसने लगे और धरती फसलों से लहलहा उठी।

परिवर्तिनी एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और कथा सुनते हैं। परंपरा में इस दिन शयन करते विष्णु के करवट बदलने का उत्सव मनाया जाता है, और कई स्थानों पर भगवान की प्रतिमा को जल-विहार के लिए ले जाया जाता है, जिससे इसे जलझूलनी एकादशी कहते हैं।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

पद्म पुराण के अनुसार इस दिन ब्राह्मण को वस्त्र में लिपटा जल से भरा घड़ा, दही-भात, छाता और जूते दान करने चाहिए। अगले दिन द्वादशी को शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि

दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा कर कथा सुनें, ब्राह्मण को जलकुंभ, दही-भात, छाता और जूते दान करें, और अगले दिन द्वादशी को पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।

परिवर्तिनी (पद्मा) एकादशी व्रत कथा पढ़ें
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परिवर्तिनी एकादशी के बारे में

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को रखा जाने वाला व्रत है, जिसे पद्म पुराण में पद्मा एकादशी कहा गया है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि, दान और पद्म पुराण में दी गई राजा मांधाता व अकाल की कथा का सार है।

सामान्य प्रश्न

परिवर्तिनी एकादशी 2027 कब है?

परिवर्तिनी एकादशी 2027 में शनिवार, 11 सितंबर को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।

इसे परिवर्तिनी एकादशी क्यों कहते हैं?

परंपरा में माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से योगनिद्रा में गए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व (करवट) एकादशी कहते हैं। पद्म पुराण के इसके माहात्म्य में इसका नाम पद्मा एकादशी है।

परिवर्तिनी एकादशी की कथा क्या है?

पद्म पुराण के अनुसार राजा मांधाता के राज्य में तीन वर्ष का अकाल पड़ा। अंगिरा ऋषि के बताए पद्मा एकादशी के व्रत को राजा ने सारी प्रजा के साथ किया, और उसके प्रभाव से खूब वर्षा हुई।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु (हृषीकेश)
तिथिभाद्रपद शुक्ल एकादशी
अन्य नामपद्मा, पार्श्व, जलझूलनी, वामन एकादशी
संबंधित कथाराजा मांधाता और अकाल
व्रत प्रकारउपवास, द्वादशी को पारण