कामदा एकादशी
कामदा एकादशी चैत्र मास की शुक्ल एकादशी को, राम नवमी के दो दिन बाद मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार यह पाप रूपी ईंधन के लिए दावानल है और पिशाच-योनि से मुक्ति देती है।

यह एकादशी राम नवमी के दो दिन बाद आती है और हिंदू नव वर्ष की पहली एकादशी है। 2028 में स्मार्त परंपरा में व्रत 5 अप्रैल को और वैष्णव परंपरा में 6 अप्रैल को है।
कामदा एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में महर्षि वसिष्ठ राजा दिलीप को बताते हैं कि चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी परम पवित्र है और पाप रूपी ईंधन के लिए दावानल है। यह ब्रह्महत्या आदि पापों का नाश करती है और पिशाच-योनि को मिटाती है। तीनों लोकों में इससे बढ़कर कोई तिथि नहीं, और इसकी कथा पढ़ने-सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
कथा के अनुसार नागपुर में नागराज पुंडरीक की सभा में गाते हुए गंधर्व ललित अपनी पत्नी ललिता को याद करने लगा और उसके गीत का क्रम टूट गया। कर्कोटक नाग के बताने पर पुंडरीक ने क्रोध में उसे मनुष्यों को खाने वाला राक्षस होने का शाप दिया, और ललित आठ योजन ऊंचा विकराल राक्षस बन गया।
ललिता रोती हुई पति के साथ वनों में भटकती रही। एक आश्रम में शांत स्वरूप वाले एक मुनि ने उसे कामदा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य पति को देने को कहा। ललिता ने उपवास किया और द्वादशी को भगवान वासुदेव के सामने पुण्य अर्पित किया। उसी क्षण ललित का राक्षस-भाव चला गया और दोनों दिव्य विमान पर बैठकर पहले से भी सुंदर रूप में शोभित हुए।
कामदा एकादशी कैसे मनाई जाती है
भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और कामदा एकादशी की कथा सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है।
कथा में ललिता ने व्रत का पुण्य अपने पति को अर्पित किया, इसलिए इस एकादशी पर बहुत-से भक्त परिवार के किसी सदस्य के कष्ट-निवारण के संकल्प से भी व्रत रखते हैं। अगले दिन द्वादशी को दान देकर शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।
कामदा एकादशी पूजा विधि
दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा कर कामदा एकादशी की कथा सुनें, रात में भजन-कीर्तन करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।
कामदा एकादशी के बारे में
कामदा एकादशी चैत्र मास की शुक्ल एकादशी को पापों के नाश और शाप व पिशाच-योनि से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि और पद्म पुराण में दी गई गंधर्व ललित व ललिता की कथा का सार है।
सामान्य प्रश्न
कामदा एकादशी 2027 कब है?
कामदा एकादशी 2027 में शनिवार, 17 अप्रैल को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।
कामदा एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत ब्रह्महत्या आदि पापों का नाश करता है और पिशाच-योनि से मुक्ति देता है। इसी व्रत के पुण्य से नागराज पुंडरीक के शाप से राक्षस बना गंधर्व ललित मुक्त हुआ था।
क्या कामदा एकादशी का पुण्य किसी और को दिया जा सकता है?
कथा में ललिता ने द्वादशी को भगवान वासुदेव के सामने अपने व्रत का पुण्य पति को अर्पित किया, और उसी क्षण उसका शाप दूर हुआ। मुनि ने स्वयं उसे यही करने को कहा था।