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सौभाग्य और पाप-मुक्ति का व्रत · वैशाख कृष्ण एकादशी

वरूथिनी एकादशी

वरूथिनी एकादशी वैशाख मास की कृष्ण एकादशी को मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार यह इस लोक और परलोक में सौभाग्य देने वाली, सब पाप हरने वाली और भोग व मोक्ष देने वाली एकादशी है।

वरूथिनी एकादशी
अगली तिथि
२ मई २०२७

यह एकादशी हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) के बाद आती है। अमांत पंचांग में इसे चैत्र कृष्ण एकादशी कहा जाता है, पर तिथि वही रहती है।

वरूथिनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि वैशाख कृष्ण पक्ष की वरूथिनी एकादशी सौभाग्य देती है, सब पाप हरती है और गर्भ में बार-बार आने के बंधन को काटती है। इसी व्रत से राजा मांधाता और धुंधुमार स्वर्ग गए, और भगवान शिव ब्रह्मा के कपाल से मुक्त हुए।

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा
कथा · पद्म पुराण से पूरा माहात्म्य

श्रीकृष्ण दानों का क्रम भी बताते हैं: घोड़े से हाथी का, हाथी से भूमि का, भूमि से तिल का, तिल से सोने का और सोने से अन्न का दान बड़ा है, क्योंकि पितर, देवता और मनुष्य अन्न से ही तृप्त होते हैं। पर सबसे बड़ा विद्यादान है, और वरूथिनी का व्रत करने वाला उसी के बराबर फल पाता है।

वरूथिनी एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का मधुसूदन रूप में पूजन करते हैं और वरूथिनी एकादशी का माहात्म्य सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है, और रात में जागरण किया जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

इस एकादशी के नियम तीन दिन के हैं। दशमी को कांसे के बर्तन, उड़द, मसूर, चना, कोदो, शाक, मधु, दूसरे का अन्न, दो बार भोजन और मैथुन का त्याग करें। एकादशी को जुआ, नींद, पान, दातुन, निंदा, चुगली, चोरी, हिंसा, रति, क्रोध और झूठ से बचें। द्वादशी को पारण के बाद भी दो बार भोजन, तेल, मधु, व्यायाम और यात्रा से बचें।

वरूथिनी एकादशी पूजा विधि

दशमी को एक बार सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान मधुसूदन की पूजा कर वरूथिनी एकादशी का माहात्म्य सुनें, रात में जागरण करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।

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वरूथिनी एकादशी के बारे में

वरूथिनी एकादशी वैशाख मास की कृष्ण एकादशी को सौभाग्य और पापों से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि, तीन दिन के नियम और पद्म पुराण में दिए गए माहात्म्य का सार है।

सामान्य प्रश्न

वरूथिनी एकादशी 2027 कब है?

वरूथिनी एकादशी 2027 में रविवार, 2 मई को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।

वरूथिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?

पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत इस लोक और परलोक में सौभाग्य देता है, सब पाप हरता है और भोग व मोक्ष देता है। इसका फल दस हजार वर्ष के तप और सूर्य ग्रहण पर कुरुक्षेत्र में स्वर्णदान के बराबर बताया गया है।

वरूथिनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

पद्म पुराण के अनुसार एकादशी को जुआ, नींद, पान, दातुन, दूसरों की निंदा, चुगली, चोरी, हिंसा, रति, क्रोध और झूठ, इन ग्यारह बातों का त्याग करना चाहिए।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु (मधुसूदन)
तिथिवैशाख कृष्ण एकादशी
महत्वसौभाग्य, पापों का नाश, भोग और मोक्ष
विशेष नियमदशमी को दस, एकादशी को ग्यारह और द्वादशी को बारह बातों का त्याग
व्रत प्रकारउपवास व रात्रि जागरण, द्वादशी को पारण