यह एकादशी होली के बाद और चैत्र नवरात्रि से पहले आती है। अमांत पंचांग में इसे फाल्गुन कृष्ण एकादशी कहा जाता है, पर तिथि वही रहती है।
पापमोचनी एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में लोमश ऋषि राजा मांधाता को बताते हैं कि चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पापमोचनी नाम से प्रसिद्ध है, जो पिशाच-योनि का नाश करती है। इसे पढ़ने और सुनने से हजार गौओं के दान का फल मिलता है, और ब्रह्महत्या जैसे महापातक करने वाले भी इस व्रत से पाप-मुक्त हो जाते हैं।
कथा के अनुसार वसंत ऋतु में चैत्ररथ वन में अप्सरा मंजुघोषा ने च्यवन ऋषि के पुत्र, ब्रह्मचारी मेधावी का तप भंग किया। वह सत्तावन वर्ष उनके साथ रही, पर मुनि को यह समय आधी रात जैसा लगा। समय का बोध होने पर अपना तप नष्ट हुआ जानकर मेधावी ने उसे पिशाची होने का शाप दिया।
मंजुघोषा के क्षमा मांगने पर मेधावी ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत बताया। पिता च्यवन ने मेधावी को भी अपने पाप के प्रायश्चित्त के रूप में यही व्रत बताया। दोनों ने यह व्रत किया: मेधावी फिर तप से युक्त हुए, और मंजुघोषा पिशाच-योनि से छूटकर दिव्य रूप में स्वर्ग लौटी।
पापमोचनी एकादशी कैसे मनाई जाती है
भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और पापमोचनी एकादशी की कथा सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है।
कथा में च्यवन ऋषि यह व्रत प्रायश्चित्त के रूप में बताते हैं, इसलिए इस एकादशी पर जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगने और भगवान के नाम-स्मरण का विशेष महत्व है। अगले दिन द्वादशी को दान देकर शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।
पापमोचनी एकादशी पूजा विधि
दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा कर पापमोचनी एकादशी की कथा सुनें, रात में भजन-कीर्तन करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।
पापमोचनी एकादशी के बारे में
पापमोचनी एकादशी चैत्र मास की कृष्ण एकादशी को सब पापों और पिशाच-योनि से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि और पद्म पुराण में दी गई मेधावी ऋषि व अप्सरा मंजुघोषा की कथा का सार है।
सामान्य प्रश्न
पापमोचनी एकादशी 2027 कब है?
पापमोचनी एकादशी 2027 में शुक्रवार, 2 अप्रैल को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।
पापमोचनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत सब पापों का क्षय करता है और पिशाच-योनि से मुक्ति देता है। इसी व्रत से मेधावी ऋषि का पाप नष्ट हुआ और शाप से पिशाची बनी अप्सरा मंजुघोषा मुक्त हुई।
पापमोचनी एकादशी की कथा किसने किसे सुनाई?
पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को वह कथा सुनाते हैं, जो लोमश ऋषि ने चक्रवर्ती राजा मांधाता के पूछने पर कही थी।
