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चातुर्मास के आरंभ का व्रत · आषाढ़ शुक्ल एकादशी

देवशयनी एकादशी

देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जिसे हरिशयनी, पद्मा या आषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन करते हैं, और यहीं से चातुर्मास आरंभ होता है।

देवशयनी एकादशी
अगली तिथि
१४ जुलाई २०२७

इसी दिन से चातुर्मास आरंभ होता है, जो कार्तिक शुक्ल की देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। महाराष्ट्र में यह आषाढ़ी एकादशी के रूप में पंढरपुर की वारी का मुख्य दिन है।

देवशयनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की शयनी एकादशी स्वर्ग और मोक्ष देने वाली है, और इसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। जो इस दिन कमल के फूलों से भगवान वामन की पूजा करता है, वह तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओं की पूजा कर लेता है।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा
कथा · राजा बलि और वामन की पूरी कथा

कथा के अनुसार त्रेता युग में दैत्यराज बलि भगवान का भक्त था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान ने पांचवें अवतार में वामन रूप धारण कर बलि से साढ़े तीन पग भूमि मांगी, और विराट रूप में तीन पगों से सारे लोक नाप लिए, आधा पग बलि की पीठ पर रखा। बलि रसातल गया, पर उसके विनय से भगवान प्रसन्न हुए।

इसीलिए इस दिन से भगवान का एक रूप बलि के पास रहता है, और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की पीठ पर कार्तिक की एकादशी तक सोता है। इन चार महीनों को चातुर्मास कहते हैं।

देवशयनी एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, कमल के फूलों से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और देवशयनी एकादशी की कथा सुनते हैं। कथा में रात्रि जागरण पर विशेष बल है, इसलिए रात भर भजन-कीर्तन होता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

पद्म पुराण के अनुसार चातुर्मास में भूमि पर सोना, दीपदान करना, पलाश के पत्ते पर भोजन करना, और श्रावण में शाक, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल का त्याग करना चाहिए। परंपरा में इन चार महीनों में विवाह और गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

देवशयनी एकादशी पूजा विधि

दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। कमल के फूलों से भगवान वामन (विष्णु) की पूजा कर कथा सुनें, रात भर जागरण करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें। इसी दिन से चातुर्मास के नियम आरंभ करें।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें
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देवशयनी एकादशी के बारे में

देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु के शयन और चातुर्मास के आरंभ पर रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि, चातुर्मास के नियम और पद्म पुराण में दी गई राजा बलि व वामन की कथा का सार है।

सामान्य प्रश्न

देवशयनी एकादशी 2027 कब है?

देवशयनी एकादशी 2027 में बुधवार, 14 जुलाई को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्यों सोते हैं?

पद्म पुराण के अनुसार वामन रूप में भगवान ने राजा बलि से भूमि लेकर उसे रसातल भेजा, और उसके विनय से प्रसन्न होकर इस दिन से उनका एक रूप बलि के पास रहता है और दूसरा शेषनाग पर कार्तिक की एकादशी तक सोता है।

चातुर्मास कब से कब तक होता है?

चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल की देवशयनी एकादशी से आरंभ होकर कार्तिक शुक्ल की देवउठनी एकादशी तक चलता है, जब भगवान विष्णु जागते हैं।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु (वामन)
तिथिआषाढ़ शुक्ल एकादशी
अन्य नामहरिशयनी, पद्मा, आषाढ़ी एकादशी
महत्वभगवान विष्णु का शयन, चातुर्मास का आरंभ
व्रत प्रकारउपवास व रात्रि जागरण, द्वादशी को पारण