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पाप और रोग से मुक्ति का व्रत · आषाढ़ कृष्ण एकादशी

योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार यह महापातकों का नाश करने वाली और संसार-सागर में डूबे लोगों के लिए नौका के समान एकादशी है।

योगिनी एकादशी
अगली तिथि
३० जून २०२७

यह एकादशी निर्जला एकादशी और देवशयनी एकादशी के बीच आती है। अमांत पंचांग में इसे ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी कहा जाता है, पर तिथि वही रहती है।

योगिनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी सब पापों का क्षय करती है और भोग व मोक्ष देती है। इसका व्रत करने वाला अठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल पाता है, और इसकी कथा पढ़ने-सुनने से सब पापों से छूट जाता है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा
कथा · हेममाली और मार्कंडेय ऋषि की पूरी कथा

कथा के अनुसार अलकापुरी में यक्ष हेममाली रोज़ मानसरोवर से कमल लाकर कुबेर की शिव-पूजा के लिए देता था। एक दिन पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में वह समय भूल गया। क्रोधित कुबेर ने उसे अठारह प्रकार के कुष्ठ और पत्नी से बिछुड़ने का शाप दिया, और वह धरती पर गिरकर दुख में भटकने लगा।

भटकते हुए वह हिमालय पर मार्कंडेय ऋषि के पास पहुंचा और सच-सच अपना अपराध बताया। ऋषि ने उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत के पुण्य से उसके अठारहों कुष्ठ दूर हो गए और वह सुखी हुआ।

योगिनी एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और योगिनी एकादशी की कथा सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

कथा में कुबेर की शिव-पूजा और मार्कंडेय ऋषि का उपदेश दोनों आते हैं, इसलिए यह एकादशी विष्णु और शिव दोनों के भक्तों में मानी जाती है। अगले दिन द्वादशी को दान देकर शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।

योगिनी एकादशी पूजा विधि

दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा कर योगिनी एकादशी की कथा सुनें, रात में भजन-कीर्तन करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।

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योगिनी एकादशी के बारे में

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को पापों और रोग से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि और पद्म पुराण में दी गई यक्ष हेममाली व मार्कंडेय ऋषि की कथा का सार है।

सामान्य प्रश्न

योगिनी एकादशी 2027 कब है?

योगिनी एकादशी 2027 में बुधवार, 30 जून को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।

योगिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?

पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत महापातकों का नाश करता है और भोग व मोक्ष देता है। इसी व्रत से कुबेर के शाप से कुष्ठ-पीड़ित यक्ष हेममाली रोग-मुक्त हुआ था।

योगिनी एकादशी की कथा में कौन-कौन हैं?

कथा में अलकापुरी के राजा कुबेर, उनका फूल लाने वाला यक्ष सेवक हेममाली, उसकी पत्नी विशालाक्षी, और हिमालय पर तप करने वाले मार्कंडेय ऋषि हैं।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु
तिथिआषाढ़ कृष्ण एकादशी
महत्वमहापातकों और रोग से मुक्ति
संबंधित कथायक्ष हेममाली और मार्कंडेय ऋषि
व्रत प्रकारउपवास, द्वादशी को पारण