कामिका एकादशी
कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण एकादशी को, चातुर्मास के पहले महीने में मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार इसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है, और इस दिन तुलसीदल से भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।

यह एकादशी देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास की पहली एकादशी है। अमांत पंचांग में इसे आषाढ़ कृष्ण एकादशी कहा जाता है। 2027 में स्मार्त परंपरा में व्रत 29 जुलाई को और वैष्णव परंपरा में 30 जुलाई को है।
कामिका एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में ब्रह्मा जी नारद जी को बताते हैं कि श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी पर श्रीधर रूप में भगवान विष्णु की पूजा का फल गंगा, काशी, नैमिष और पुष्कर में स्नान से भी बड़ा है, और कामिका का व्रत समुद्र और वनों सहित पृथ्वी के दान के बराबर है। रात में जागरण करने वाला न यम को देखता है, न दुर्गति में जाता है।
इस एकादशी पर तुलसी की महिमा विशेष है। कथा के अनुसार रत्नों और मोतियों से पूजा करने पर भी विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसीदल से, और तुलसीदल से पूजा करने वाला पाप से वैसे ही अलिप्त रहता है जैसे कमल का पत्ता जल से। एकादशी के दिन भगवान के आगे जलाया दीप स्वर्ग में पितरों को अमृत से तृप्त करता है।
कामिका एकादशी कैसे मनाई जाती है
भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, तुलसी के पत्तों और मंजरियों से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और कामिका एकादशी का माहात्म्य सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है।
इस दिन भगवान के आगे घी या तिल के तेल का दीप दिन-रात जलाने की परंपरा है, और रात भर जागरण किया जाता है। अगले दिन द्वादशी को दान देकर शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।
कामिका एकादशी पूजा विधि
दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। श्रीधर रूप में भगवान विष्णु की तुलसीदल और मंजरियों से पूजा करें, घी या तिल के तेल का दीप जलाएं, माहात्म्य सुनें, रात में जागरण करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।
कामिका एकादशी के बारे में
कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण एकादशी को पापों के नाश और पितरों की तृप्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि, तुलसी पूजन और पद्म पुराण में दिए गए माहात्म्य का सार है।
सामान्य प्रश्न
कामिका एकादशी 2027 कब है?
कामिका एकादशी 2027 में गुरुवार, 29 जुलाई को है; वैष्णव परंपरा में व्रत शुक्रवार, 30 जुलाई को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।
कामिका एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत पाप के कीचड़ से भरे संसार-सागर में डूबे लोगों के उद्धार के लिए है। यह ब्रह्महत्या का पाप हरता है, विष्णु का धाम देता है, और इसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
कामिका एकादशी पर तुलसी पूजा क्यों करें?
कथा के अनुसार भगवान विष्णु रत्नों, मोतियों और मूंगों से उतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसीदल से, और तुलसी की मंजरियों से पूजा करने वाले के जन्म भर के पाप नष्ट हो जाते हैं।