गुरुवार, 5 नवम्बर 2026 का पर्व

रमा एकादशी 2026: व्रत 5 नवम्बर को, पारण 6 नवम्बर सुबह 6:37 से 8:48

आस्था संग्रह संपादकीय टीम
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भोर में तुलसी के पौधे और दीपक के साथ भगवान विष्णु का चित्र

रमा एकादशी का व्रत गुरुवार, 5 नवम्बर 2026 को है। व्रत का पारण अगले दिन, 6 नवम्बर को सुबह 6:37 से 8:48 के बीच करें (नई दिल्ली)।

व्रत
गुरुवार, 5 नवम्बर 2026
एकादशी तिथि
4 नवम्बर सुबह 11:03 से 5 नवम्बर सुबह 10:35 तक
पारण
6 नवम्बर, सुबह 6:37 से 8:48 तक
द्वादशी समाप्त
6 नवम्बर, सुबह 10:30

व्रत 5 को, जबकि तिथि 4 से शुरू

एकादशी तिथि 4 नवम्बर को सुबह 11:03 पर शुरू हो रही है, पर व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो। 5 नवम्बर का सूर्योदय 6:35 पर एकादशी में होगा, इसलिए व्रत 5 नवम्बर, गुरुवार को है। तिथि उसी दिन सुबह 10:35 पर समाप्त हो जाएगी, पर व्रत पूरे दिन और रात चलता है।

पारण का समय क्यों मायने रखता है

एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि रहते हुए खोला जाता है। इस बार द्वादशी 6 नवम्बर सुबह 10:30 पर समाप्त हो रही है, इसलिए पारण का समय सुबह 6:37 से 8:48 तक है। शास्त्रों में द्वादशी निकल जाने के बाद पारण को उचित नहीं माना गया है, इसलिए 6 नवम्बर की सुबह जल्दी तैयारी कर लें।

पारण से पहले स्नान कर भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ भोग लगाएं, और फिर उसी प्रसाद से व्रत खोलें। अनेक परिवारों में पारण से पहले किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को अन्न दान करने की भी परंपरा है। व्रत की तैयारी एक दिन पहले से होती है: 4 नवम्बर को सूर्यास्त से पहले हल्का सात्विक भोजन करें और चावल न खाएं।

रमा नाम और दिवाली से संबंध

रमा मां लक्ष्मी का एक नाम है, और यह एकादशी दिवाली से ठीक पहले पड़ती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी जी की भी पूजा की जाती है। इस बार पारण वाले दिन, 6 नवम्बर को ही धनतेरस है, यानी व्रत खोलते ही दीपोत्सव का पहला दिन शुरू हो जाएगा। 5 नवम्बर की शाम को गोवत्स द्वादशी भी है, जिसमें गाय और बछड़े की पूजा होती है; महाराष्ट्र में इसे वसु बारस कहते हैं।

शोभन और चंद्रभागा की कथा

कथा में राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा का विवाह राजकुमार शोभन से होता है, जो शरीर से बहुत दुर्बल था। मुचुकुंद के राज्य में एकादशी पर कोई अन्न नहीं खाता था, और शोभन भी व्रत रखता है, पर दुर्बलता के कारण अगली सुबह होते-होते उसके प्राण चले जाते हैं। व्रत के पुण्य से उसे मंदराचल पर्वत पर एक दिव्य नगर मिलता है, पर वह स्थिर नहीं रहता। तब चंद्रभागा अपने एकादशी व्रतों का पुण्य पति को अर्पित करती है, और वह नगर सदा के लिए स्थिर हो जाता है।

जप का मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

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आपके सवाल

क्या व्रत में फलाहार कर सकते हैं?

हां। निर्जला व्रत सबसे कठोर माना जाता है, पर अधिकतर लोग फल, दूध और साबूदाना जैसा फलाहार लेकर व्रत रखते हैं। चावल और अनाज एकादशी पर नहीं खाए जाते।

पारण का समय निकल जाए तो?

कोशिश करें कि पारण 8:48 तक हो जाए। किसी कारण देर हो जाए तो द्वादशी समाप्त होने, यानी सुबह 10:30, से पहले अवश्य व्रत खोल लें।

क्या एकादशी की रात जागरण करना चाहिए?

एकादशी की रात भजन-कीर्तन और विष्णु नाम-जप के साथ जागरण की परंपरा है। पूरी रात जागना संभव न हो तो सोने से पहले विष्णु सहस्रनाम या आरती का पाठ कर लें।

तिथियां और समय द्रिक पंचांग व हमारे पंचांग से जांचे गए, नई दिल्ली के अनुसार।