थाई पोंगल, अर्थात मुख्य दिवस, वही सौर तिथि है जिस दिन उत्तर भारत में मकर संक्रांति मनाई जाती है, इसलिए यह भी प्रतिवर्ष लगभग स्थिर ग्रेगोरियन तिथि पर आता है। इससे एक दिन पूर्व भोगी तथा अगले दो दिन क्रमशः मट्टु पोंगल व कानुम पोंगल मनाए जाते हैं।
पोंगल का महत्व
पोंगल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश तथा उत्तरायण काल के आरंभ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति मनाई जाती है। यह फसल पर्व है, जो धान की नई फसल की कटाई के अवसर पर सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु मनाया जाता है।
उत्सव चार दिनों तक चलता है, पहला दिन 'भोगी', जिसमें पुरानी व अनुपयोगी वस्तुओं को अलाव में जलाकर नए की शुरुआत की जाती है; दूसरा दिन 'थाई पोंगल', जो मुख्य दिवस है; तीसरा दिन 'मट्टु पोंगल', जिसमें पशुधन विशेषकर बैलों की पूजा की जाती है; तथा चौथा दिन 'कानुम पोंगल', जो परिवार व मित्रों संग मिलने का दिन है।
थाई पोंगल के दिन ही सूर्य देव के साथ-साथ इंद्र देव का भी आभार व्यक्त किया जाता है, जिनकी कृपा से पर्याप्त वर्षा होकर अच्छी फसल संभव हुई। यह पर्व मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है, तथा विश्वभर में बसे तमिल समुदायों द्वारा भी हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
पोंगल कैसे मनाई जाती है
भोगी के दिन घरों की सफाई कर पुराने व अनुपयोगी सामान को अलाव में जलाया जाता है, जो जीवन में नए की शुरुआत का प्रतीक है।
थाई पोंगल के दिन प्रातःकाल घर के आंगन में नई मिट्टी की हांडी में नए चावल, गुड़ व दूध से 'पोंगल' नामक पकवान उबाला जाता है। हांडी से दूध उफनकर बाहर बहने को शुभ माना जाता है, तथा उपस्थित सभी लोग 'पोंगलो पोंगल' कहकर हर्ष व्यक्त करते हैं।
मट्टु पोंगल के दिन बैलों व गायों को स्नान कराकर सींगों को रंगा जाता है, फूल-मालाओं से सजाया जाता है, तथा विशेष भोजन कराया जाता है। कुछ क्षेत्रों में 'जल्लीकट्टू' नामक बैलों को वश में करने की परंपरागत प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। कानुम पोंगल के दिन परिवार एक साथ भोजन करते हैं तथा एक-दूसरे के घर जाते हैं।
पोंगल पूजा विधि
भोगी के दिन घर की सफाई कर पुराना सामान अलाव में जलाएं। थाई पोंगल के प्रातःकाल नई मिट्टी की हांडी में चावल, गुड़ व दूध से पोंगल पकवान उबालें तथा सूर्य देव को अर्पित करें। मट्टु पोंगल के दिन पशुधन का पूजन करें, तथा कानुम पोंगल के दिन परिवार सहित भोजन करें।
पोंगल के बारे में
पोंगल तमिलनाडु का प्रमुख चार दिवसीय फसल पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर पोंगल का महत्व, भोगी-थाई पोंगल-मट्टु पोंगल-कानुम पोंगल के चार दिनों, तथा पोंगल पकवान उबालने की परंपरा की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
पोंगल कब मनाया जाता है?
पोंगल प्रतिवर्ष 14 अथवा 15 जनवरी के आसपास, तमिल थाई मास के पहले दिन, चार दिनों तक मनाया जाता है।
पोंगल और मकर संक्रांति में क्या संबंध है?
थाई पोंगल, अर्थात पोंगल का मुख्य दिवस, वही सौर तिथि है जिस दिन उत्तर भारत में मकर संक्रांति मनाई जाती है, दोनों सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का उत्सव हैं, केवल क्षेत्रीय नाम व परंपराएं भिन्न हैं।
पोंगल के चार दिन कौन-कौन से हैं?
पोंगल के चार दिन हैं, भोगी, थाई पोंगल (मुख्य दिन), मट्टु पोंगल (पशुधन पूजन) और कानुम पोंगल (पारिवारिक मिलन का दिन)।
पोंगल हांडी से दूध उफनना शुभ क्यों माना जाता है?
दूध या पकवान का हांडी से उफनकर बाहर बहना समृद्धि व प्रचुरता का शुभ संकेत माना जाता है, तथा इसी क्षण उपस्थित लोग 'पोंगलो पोंगल' कहकर हर्ष व्यक्त करते हैं।
