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पिशाच-योनि से मुक्ति का व्रत · माघ शुक्ल एकादशी

जया एकादशी

जया एकादशी माघ मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। पद्म पुराण के अनुसार यह ब्रह्महत्या के पाप को हरने वाली और पिशाच-योनि से मुक्ति देने वाली एकादशी है।

जया एकादशी
अगली तिथि
१७ फ़रवरी २०२७

यह एकादशी भीष्म अष्टमी के तीन दिन बाद और माघ पूर्णिमा से चार दिन पहले आती है। 2028 में स्मार्त परंपरा में व्रत 6 फ़रवरी को और वैष्णव परंपरा में 7 फ़रवरी को है।

जया एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी पवित्र, पापनाशक और मनोरथ व मोक्ष देने वाली है, ब्रह्महत्या का पाप हरती है और पिशाच-योनि का नाश करती है। इसका व्रत करने वाले प्रेत नहीं बनते, और इससे बढ़कर पापनाशक कोई तिथि नहीं।

जया एकादशी व्रत कथा
कथा · माल्यवान और पुष्पवती की पूरी कथा

कथा के अनुसार इंद्र की सभा में गाते समय गंधर्व माल्यवान और पुष्पवती एक-दूसरे पर मोहित हो गए और उनका ताल बिगड़ गया। इसे अपना अपमान मानकर इंद्र ने उन्हें पति-पत्नी के रूप में पिशाच बनकर मृत्युलोक में जाने का शाप दिया। हिमालय की बर्फ में भटकते, ठंड से कांपते वे अपना गंधर्व रूप तक भूल गए।

भाग्यवश जया एकादशी के दिन दुख और ठंड के कारण उन्होंने कुछ खाया-पिया नहीं और एक पीपल के पास रात भर जागते रहे। इस अनजाने व्रत से द्वादशी को भगवान विष्णु की कृपा से उनकी पिशाच-योनि छूट गई, और वे विमान पर बैठकर स्वर्ग लौटे, जहां इंद्र ने उन्हें वंदनीय कहा।

जया एकादशी कैसे मनाई जाती है

भक्तगण इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और जया एकादशी की कथा सुनते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, केवल जल या फलाहार व्रत रखा जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती
आरती · एकादशी पूजन में गाई जाने वाली आरती

कथा में रात्रि जागरण से ही गंधर्वों की मुक्ति हुई, इसलिए इस एकादशी पर रात भर भजन-कीर्तन और जागरण का विशेष महत्व है। अगले दिन द्वादशी को दान देकर शास्त्रोक्त पारण-मुहूर्त में व्रत खोला जाता है।

जया एकादशी पूजा विधि

दशमी को सात्विक भोजन कर एकादशी को प्रातः स्नान करें और उपवास का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा कर जया एकादशी की कथा सुनें, रात भर जागरण करें, और अगले दिन द्वादशी को दान देकर पारण-मुहूर्त में व्रत खोलें।

जया एकादशी व्रत कथा पढ़ें
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जया एकादशी के बारे में

जया एकादशी माघ मास की शुक्ल एकादशी को ब्रह्महत्या जैसे पापों और पिशाच-योनि से मुक्ति की कामना से रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इसकी तिथि, व्रत की विधि और पद्म पुराण में दी गई गंधर्व माल्यवान व पुष्पवती की कथा का सार है।

सामान्य प्रश्न

जया एकादशी 2027 कब है?

जया एकादशी 2027 में बुधवार, 17 फ़रवरी को है। पारण का समय नज़दीक आने पर यहां जोड़ा जाएगा।

जया एकादशी क्यों मनाई जाती है?

पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत ब्रह्महत्या के पाप को हरता है और पिशाच-योनि से मुक्ति देता है। इसी व्रत से इंद्र के शाप से पिशाच बने गंधर्व माल्यवान और पुष्पवती मुक्त हुए थे।

जया एकादशी पर रात्रि जागरण क्यों करें?

कथा में माल्यवान और पुष्पवती ठंड के कारण जया की पूरी रात सो न सके, और भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि उपवास के साथ इसी रात्रि जागरण से उन्होंने उनकी मुक्ति का निश्चय किया। इसलिए इस एकादशी पर जागरण का विशेष महत्व है।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु
तिथिमाघ शुक्ल एकादशी
महत्वब्रह्महत्या के पाप और पिशाच-योनि से मुक्ति
संबंधित कथागंधर्व माल्यवान और पुष्पवती
व्रत प्रकारउपवास व रात्रि जागरण, द्वादशी को पारण