मुख्यत्योहारगंगा दशहरा
गंगावतरण पर्व · ज्येष्ठ शुक्ल दशमी

गंगा दशहरा

गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जो मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का स्मरण कराता है।

गंगा दशहरा
अगली तिथि
१३ जून २०२७

गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त दशमी तिथि रहते हुए ही माना जाता है, जिसका सटीक समय प्रतिवर्ष बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें। इसे 'गंगावतरण' के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा दशहरा का महत्व

कथा के अनुसार, राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को कपिल मुनि के शाप से भस्म हो जाने के पश्चात उनकी आत्माओं की मुक्ति हेतु उनके वंशज राजा भगीरथ ने वर्षों कठोर तपस्या कर मां गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रयास किया। मां गंगा के प्रचंड वेग को धारण करने में पृथ्वी असमर्थ थी, इसलिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर, धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया।

गंगा दशहरा व्रत कथा
कथा · भगीरथ की तपस्या व गंगावतरण की कथा

मान्यता है कि मां गंगा इसी ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसीलिए इस दिन को 'गंगा दशहरा' अथवा 'गंगावतरण' कहा जाता है। गंगा जल को समस्त पापों का नाश करने वाला व मोक्षदायी माना जाता है।

इस दिन को दस प्रकार के पापों के नाश से जोड़ा जाता है, इसीलिए तिथि के नाम में 'दशहरा' शब्द जुड़ा है, दस का हरण। इस दिन गंगा तट पर स्नान करने तथा दस वस्तुओं का दान करने का विशेष महत्व माना जाता है।

गंगा दशहरा कैसे मनाई जाती है

हरिद्वार, वाराणसी, ऋषिकेश व प्रयागराज सहित गंगा तट के अनेक नगरों में इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान हेतु एकत्रित होते हैं।

जो लोग गंगा तट तक नहीं पहुंच पाते, वे घर पर ही जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं तथा मां गंगा की आरती व पूजा करते हैं।

इस दिन दस वस्तुओं, जल से भरा घड़ा, पंखा, चप्पल, छाता, वस्त्र, फल, दक्षिणा जैसी वस्तुओं, का दान करने की परंपरा है, जिसे दस पापों के नाश हेतु विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

गंगा दशहरा पूजा विधि

संभव हो तो गंगा तट पर जाकर स्नान करें, अन्यथा घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। मां गंगा की आरती करें तथा जल से भरा घड़ा, पंखा, वस्त्र, फल व दक्षिणा सहित दस वस्तुओं का दान करें। दिनभर फलाहार व्रत रखें।

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गंगा दशहरा के बारे में

गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जो मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का स्मरण कराता है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, राजा भगीरथ की तपस्या की कथा, तथा गंगा स्नान व दस वस्तुओं के दान की परंपरा की जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

गंगा दशहरा कब मनाया जाता है?

गंगा दशहरा प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो सामान्यतः मई-जून में आता है।

भगीरथ कौन थे?

भगीरथ राजा सगर के वंशज थे, जिन्होंने अपने साठ हजार पूर्वजों की आत्माओं की मुक्ति हेतु वर्षों कठोर तपस्या कर मां गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाया था।

गंगा दशहरा को दस वस्तुओं का दान क्यों किया जाता है?

यह दिन दस प्रकार के पापों के नाश से जुड़ा माना जाता है, इसीलिए इस दिन दस वस्तुओं के दान को विशेष पुण्यदायी माना गया है।

गंगा दशहरा और गंगावतरण में क्या अंतर है?

दोनों एक ही पर्व के नाम हैं, 'गंगावतरण' मां गंगा के अवतरण को दर्शाता है, जबकि 'गंगा दशहरा' दस पापों के नाश की मान्यता को दर्शाता है।

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मुख्य जानकारी

देवतामां गंगा
तिथिज्येष्ठ शुक्ल दशमी
विशेष अनुष्ठानगंगा स्नान, दस वस्तुओं का दान
अन्य नामगंगावतरण
व्रत प्रकारगंगा स्नान के पश्चात फलाहार