पाठ विवरण
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता॥
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।
श्री गंगा आरती पाठ विधि
गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी अथवा संध्या समय गंगा तट पर दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति 'ॐ जय गंगे माता' दोहराएं।
श्री गंगा आरती के बारे में
गंगा आरती, जिसे उसकी पहली पंक्ति के कारण 'ॐ जय गंगे माता' के नाम से भी जाना जाता है, माँ गंगा को राजा सगर के पुत्रों की मुक्तिदाता और यमराज के भय को मिटाने वाली के रूप में वर्णित करती है। रचना एक स्थायी पंक्ति से आरंभ होकर चार कड़ियों में आगे बढ़ती है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।
इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।
इस आरती के रचयिता का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, और न ही किसी कड़ी में कोई हस्ताक्षर मिलता है। कभी-कभी इसे गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है, परंतु यह भ्रम वास्तव में एक भिन्न रचना 'जय जय भागीरथ नंदिनी' से उत्पन्न होता है, जो गंगा तट पर होने वाली संध्या आरती में गाई जाती है। यह आरती माँ गंगा की सबसे लोकप्रिय पूजा-आरती है, जो घर-घर में तथा गंगा तट के मंदिरों में समान रूप से गाई जाती है।
गंगा आरती के लाभ
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से यमराज का भय मिटता है तथा भवसागर से पार होकर मुक्ति की प्राप्ति होती है; गंगा दशहरा व गंगा सप्तमी को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
सामान्य प्रश्न
गंगा आरती की रचना किसने की?
इसके रचयिता का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। इसे कभी-कभी तुलसीदास से जोड़ा जाता है, परंतु यह वास्तव में एक भिन्न रचना 'जय जय भागीरथ नंदिनी' के भ्रम से उत्पन्न होता है।
क्या गंगा आरती और 'ॐ जय गंगे माता' एक ही हैं?
हाँ, यह वही आरती है, इसका औपचारिक नाम गंगा आरती है, परंतु इसकी पहली पंक्ति 'ॐ जय गंगे माता' होने के कारण इसे इसी नाम से भी जाना जाता है।
आरती की संरचना क्या है?
एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।
क्या यह गंगा तट की संध्या आरती जैसी ही है?
नहीं, गंगा तट पर संध्या समय होने वाली भव्य आरती सामान्यतः 'जय जय भागीरथ नंदिनी' नामक भिन्न रचना पर आधारित होती है। यह पृष्ठ घर-घर में गाई जाने वाली परंपरागत 'ॐ जय गंगे माता' आरती प्रस्तुत करता है।
क्या अर्थ जानना आवश्यक है?
आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।
गंगा आरती के क्या लाभ हैं?
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से यमराज का भय मिटता है तथा भवसागर से पार होकर मुक्ति की प्राप्ति होती है; गंगा दशहरा व गंगा सप्तमी को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
