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नवरात्रि का आरंभ · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा

घटस्थापना (कलश स्थापना)

घटस्थापना नवरात्रि के पहले दिन, प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आवाहन करने की विधि है। इसी से नौ दिनों की पूजा आरंभ होती है।

घटस्थापना (कलश स्थापना)
अगली तिथि
११ अक्टूबर २०२६

चैत्र नवरात्रि में भी पहले दिन इसी विधि से घटस्थापना होती है (2027 में 7 अप्रैल)। मुहूर्त हर शहर में कुछ मिनट अलग होता है, इसलिए अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से मिला लें।

घटस्थापना (कलश स्थापना) का महत्व

घट का अर्थ है कलश और स्थापना का अर्थ है स्थापित करना। नवरात्रि में जल से भरा कलश देवी का आसन माना जाता है: पहले दिन उसमें मां दुर्गा का आवाहन होता है और नौ दिनों तक उसी की पूजा होती है।

कलश को पूरे ब्रह्माण्ड का प्रतीक भी माना जाता है। कलश पूजन के प्रसिद्ध श्लोक के अनुसार उसके मुख में विष्णु, कण्ठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और मध्य भाग में मातृगण निवास करते हैं।

कलश के पास मिट्टी में बोए गए जौ नौ दिनों में अंकुरित होकर हरे हो जाते हैं। इन्हें समृद्धि और देवी के आशीर्वाद का संकेत माना जाता है।

दुर्गा चालीसा
चालीसा · घटस्थापना के बाद पाठ

घटस्थापना (कलश स्थापना) कैसे करें

घटस्थापना प्रातःकाल, प्रतिपदा तिथि रहते की जाती है। पूजा स्थान को साफ़ कर, सामान्यतः घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर कलश स्थापित किया जाता है।

कलश स्थापना के बाद उसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है, और अनेक घरों में अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नवरात्रि भर जलती रहती है। प्रतिदिन कलश और देवी की पूजा कर दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है।

नवरात्रि पूरी होने पर, परिवार की परंपरा अनुसार दशमी को कलश का विसर्जन किया जाता है। कलश का जल घर में छिड़का जाता है और अंकुरित जौ प्रसाद रूप में रखे या बहते जल में प्रवाहित किए जाते हैं।

संक्षेप में विधि

प्रातः स्नान कर पूजा स्थान शुद्ध करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, कलश में जल भरकर सुपारी, सिक्के, दूर्वा व अक्षत डालें, आम के पांच पत्ते रखकर ढक्कन लगाएं और लाल वस्त्र में लिपटा नारियल रखें। कलश को जौ के पात्र पर स्थापित कर मां दुर्गा का आवाहन करें, पंचोपचार पूजा करें और अखंड ज्योति जलाएं।

घटस्थापना मुहूर्त 2026

तिथिरविवार, 11 अक्टूबर 2026 (प्रतिपदा रात्रि 9:30 तक)
घटस्थापना मुहूर्तप्रातः 6:19 से 10:12 तक (3 घंटे 52 मिनट)
अभिजित मुहूर्तदोपहर 11:44 से 12:31 तक

इस वर्ष प्रातः का मुहूर्त चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में पड़ रहा है, जिन्हें घटस्थापना के लिए वर्जित नहीं, किंतु अनुपयुक्त माना जाता है, इसलिए अनेक परिवार अभिजित मुहूर्त चुनते हैं। समय नई दिल्ली के अनुसार हैं, अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से अवश्य मिलाएं।

घटस्थापना के नियम

  • घटस्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय प्रतिपदा तिथि रहते दिन का प्रथम एक-तिहाई भाग माना जाता है।
  • यदि यह समय उपलब्ध न हो, तो अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है।
  • अमावस्या तिथि में तथा रात्रि के समय घटस्थापना वर्जित है, इसे मध्याह्न से पहले, प्रतिपदा रहते ही पूर्ण करें।

कलश स्थापना की सामग्री

  • जौ बोने के लिए मिट्टी का चौड़ा पात्र
  • स्वच्छ मिट्टी
  • सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज) अथवा जौ
  • मिट्टी या पीतल का छोटा कलश
  • गंगाजल अथवा शुद्ध जल
  • मौली (कलावा)
  • सुगंध (इत्र)
  • सुपारी
  • सिक्के
  • आम अथवा अशोक के पांच पत्ते
  • कलश का ढक्कन
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • जटा वाला (बिना छिला) नारियल
  • लाल वस्त्र
  • पुष्प व माला (गेंदे के फूल उत्तम)
  • दूर्वा घास

कलश स्थापना विधि

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें, फिर मुहूर्त में क्रम से ये चरण करें।

  1. १

    जौ का पात्र तैयार करें

    मिट्टी के चौड़े पात्र में मिट्टी की पहली परत बिछाकर उस पर अनाज के बीज फैलाएं। दूसरी परत में बीज पात्र के किनारों के पास फैलाएं, फिर ऊपर मिट्टी की अंतिम परत डालें और आवश्यकता हो तो थोड़ा जल छिड़कें।

  2. २

    कलश पर मौली बांधें व जल भरें

    कलश के गले पर मौली बांधें और उसे गंगाजल अथवा शुद्ध जल से भरें।

  3. ३

    कलश में सामग्री डालें

    जल में सुपारी, सुगंध, दूर्वा, अक्षत और सिक्के डालें।

  4. ४

    पत्ते रखकर ढक्कन लगाएं

    कलश के मुख के किनारे पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें, फिर उसे ढक्कन से ढक दें।

  5. ५

    नारियल स्थापित करें

    बिना छिले नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर मौली से बांधें और उसे कलश के ऊपर रखें।

  6. ६

    कलश को जौ के पात्र पर रखें

    तैयार कलश को जौ बोए गए मिट्टी के पात्र के मध्य में स्थापित करें।

  7. ७

    आवाहन व पंचोपचार पूजा

    मां दुर्गा का आवाहन कर उनसे नौ दिनों तक कलश में निवास करने की प्रार्थना करें। फिर दीप, धूप, पुष्प, गंध और नैवेद्य (फल व मिठाई), इन पांच उपचारों से पंचोपचार पूजा करें।

  8. ८

    अखंड ज्योति

    परंपरा अनुसार अखंड ज्योति प्रज्वलित करें, जो नवरात्रि के सभी दिनों तक जलती रहती है।

घटस्थापना (कलश स्थापना) के बारे में

घटस्थापना शारदीय और चैत्र, दोनों नवरात्रियों का पहला अनुष्ठान है, जिसमें कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है। इस पृष्ठ पर 2026 का मुहूर्त, घटस्थापना के नियम, पूरी सामग्री और कलश स्थापना की विधि दी गई है।

सामान्य प्रश्न

2026 में घटस्थापना कब है?

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को। नई दिल्ली के अनुसार मुहूर्त प्रातः 6:19 से 10:12 तक है, और अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:44 से 12:31 तक।

क्या घटस्थापना दोपहर या शाम को कर सकते हैं?

प्रातः का मुहूर्त न मिले तो अभिजित मुहूर्त में कर सकते हैं, जो दोपहर के आसपास होता है। रात्रि में और मध्याह्न के बाद घटस्थापना नहीं की जाती।

2026 में अनेक लोग अभिजित मुहूर्त क्यों चुन रहे हैं?

इस वर्ष प्रातः का समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में है। इन्हें घटस्थापना के लिए वर्जित नहीं, पर अनुकूल भी नहीं माना जाता, इसलिए कई परिवार अभिजित मुहूर्त में स्थापना करते हैं।

नवरात्रि के बाद जौ और कलश का क्या करें?

परंपरा अनुसार दशमी को कलश का विसर्जन करें, उसका जल घर में छिड़कें, और अंकुरित जौ प्रसाद रूप में रखें या बहते जल में प्रवाहित करें।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवतामां दुर्गा, प्रथम दिन मां शैलपुत्री
तिथिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा
2026 मुहूर्तप्रातः 6:19 से 10:12, अभिजित 11:44 से 12:31
वर्जितअमावस्या, रात्रि का समय
मुख्य सामग्रीकलश, जौ, मिट्टी, आम के पत्ते, नारियल