मुख्यचालीसासंकट मोचन हनुमानाष्टक

संकट मोचन हनुमानाष्टक

संकट मोचन हनुमानाष्टक गोस्वामी तुलसीदास रचित आठ छंदों की स्तुति है, जिसमें हनुमान जी के जीवन के आठ महान संकट-निवारण कार्यों का वर्णन कर उन्हें 'संकटमोचन' कहकर पुकारा गया है, इसे कहीं-कहीं 'संकटमोचन चौपाई' के नाम से भी जाना जाता है।

संकट मोचन हनुमानाष्टक
चौपाई/३२

पाठ विवरण

रचनाकारगोस्वामी तुलसीदास
संरचना८ छंद · १ दोहा
पाठ समय५ मिनट
चौपाई

बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।

ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो।

देवन आनि करी बिनती तब,
छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महा मुनि साप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो।

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के सँग लेन गये सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।

हेरि थके तट सिंधु सबै तब,
लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को सब,
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो।

चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तजे सुत रावन मारो।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै,
गिरि द्रोन सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो।

आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।

देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।

जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज कियो बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसों नहिं जात है टारो।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कुछ संकट होय हमारो।

को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥

अंतिम दोहा

लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

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संकट मोचन हनुमानाष्टक पाठ विधि

मंगलवार अथवा शनिवार को, अथवा किसी भी संकट के समय, स्नान के पश्चात दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक इस अष्टक का पाठ करें। पूर्ण पाठ के अंत में दोहा अवश्य दोहराएं।

पाठ दिवस
मंगलवार एवं शनिवार, तथा संकट के समय
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श्री हनुमान चालीसा
स्तोत्र · ८ मिनट
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संकट मोचन हनुमानाष्टक के बारे में

संकट मोचन हनुमानाष्टक आठ छंदों की रचना है, जिसमें प्रत्येक छंद हनुमान जी के जीवन के एक प्रसंग का स्मरण कर 'को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो' की पंक्ति से समाप्त होता है। रचना का समापन एक दोहे से होता है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक पंक्ति के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, ऑडियो के साथ पाठ किया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

हनुमानाष्टक पाठ के लाभ

मान्यता है कि संकट, भय अथवा कठिन परिस्थिति के समय श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से हनुमान जी शीघ्र सहायता करते हैं और कष्टों का निवारण होता है; प्रत्येक छंद हनुमान जी के जीवन के ऐसे ही एक प्रसंग का स्मरण कराकर यह विश्वास दृढ़ करता है कि उनके लिए कोई भी संकट असंभव नहीं।

रचनाकार
गोस्वामी तुलसीदास
१६वीं शताब्दी · अवधी

गोस्वामी तुलसीदास के बारे में

संकट मोचन हनुमानाष्टक की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की, जो हनुमान चालीसा व रामचरितमानस के भी रचयिता हैं। इसमें हनुमान जी के जीवन के आठ प्रसंगों, सूर्य को निगलना, सुग्रीव की सहायता, सीता की खोज, अशोक वाटिका, संजीवनी पर्वत, नागपाश से मुक्ति, तथा अहिरावण वध, का स्मरण कर उन्हें संकटमोचन कहकर पुकारा गया है। इस रचना को कहीं-कहीं 'संकटमोचन चौपाई' के नाम से भी संबोधित किया जाता है, यद्यपि यह चौपाई छंद में नहीं, अपितु मत्तगयंद छंद में रचित है।

सामान्य प्रश्न

संकट मोचन हनुमानाष्टक की रचना किसने की?

इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की, जो हनुमान चालीसा व रामचरितमानस के भी रचयिता हैं।

इसे 'संकटमोचन चौपाई' भी क्यों कहा जाता है?

लोक-व्यवहार में इसे 'चौपाई' नाम से भी संबोधित किया जाता है, यद्यपि यह वास्तव में मत्तगयंद छंद में रचित आठ पदों की स्तुति है, चौपाई छंद में नहीं।

हनुमानाष्टक में कौन-कौन से प्रसंगों का वर्णन है?

इसमें सूर्य को निगलना, सुग्रीव की सहायता, सीता की खोज, अशोक वाटिका में सीता को सांत्वना, संजीवनी पर्वत लाना, नागपाश से मुक्ति, तथा अहिरावण के वध, इन आठ प्रसंगों का वर्णन है।

हनुमानाष्टक पाठ का उत्तम समय क्या है?

मंगलवार व शनिवार को, अथवा किसी भी प्रकार के संकट या कठिनाई के समय इसका पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

हनुमानाष्टक पढ़ने के क्या लाभ हैं?

मान्यता है कि संकट, भय अथवा कठिन परिस्थिति के समय श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से हनुमान जी शीघ्र सहायता करते हैं और कष्टों का निवारण होता है; प्रत्येक छंद हनुमान जी के जीवन के ऐसे ही एक प्रसंग का स्मरण कराकर यह विश्वास दृढ़ करता है कि उनके लिए कोई भी संकट असंभव नहीं।

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