रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त भी भद्रा-रहित समय में ही रखा जाता है, अन्यथा भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है, इसलिए सटीक समय हेतु नज़दीकी पंचांग देखें। इसी श्रावण पूर्णिमा को कोंकण व महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में 'नारली पूर्णिमा' के नाम से समुद्र-पूजन भी किया जाता है।
रक्षाबंधन का महत्व
'रक्षाबंधन' का अर्थ है 'रक्षा का बंधन'। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी दीर्घायु व कल्याण की कामना करती है, तथा भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। रक्षा सूत्र बांधने की सबसे पुरानी कथा इंद्र व इंद्राणी से जुड़ी है, जब असुरों से युद्ध में इंद्र की पराजय निश्चित लग रही थी, तब उनकी पत्नी इंद्राणी (शची) ने भगवान विष्णु से प्राप्त एक रक्षा-सूत्र इंद्र की कलाई पर बांधा, जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई।
एक अन्य प्रिय कथा के अनुसार, शिशुपाल वध के समय भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, जिसे देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी कलाई पर बांध दिया था। इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की सदैव रक्षा करने का वचन दिया, जिसे उन्होंने बाद में चीरहरण के प्रसंग में निभाया।
यह पर्व केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं है, चचेरे-ममेरे भाई-बहन, मित्र, तथा प्रतीकात्मक रूप से सैनिकों व पेड़ों को भी राखी बांधी जाती है, जो 'रक्षा' की व्यापक भावना को दर्शाता है।
रक्षाबंधन कैसे मनाई जाती है
बहनें पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई तथा राखी रखी जाती है। भद्रा-रहित शुभ मुहूर्त में भाई की आरती उतारकर उसके माथे पर तिलक लगाया जाता है।
इसके पश्चात बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसे मिष्ठान खिलाती है। भाई बदले में बहन को उपहार अथवा धनराशि भेंट कर, जीवनभर उसकी रक्षा व सहयोग का वचन देता है।
कोंकण व महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में इसी दिन 'नारली पूर्णिमा' मनाई जाती है, जिसमें मछुआरे समुद्र देवता को नारियल अर्पित कर मानसून पश्चात मछली पकड़ने के मौसम का शुभारंभ करते हैं।
रक्षाबंधन पूजा विधि
पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिष्ठान व राखी सजाएं। भद्रा-रहित शुभ मुहूर्त में भाई को आसन पर बिठाकर आरती उतारें, माथे पर तिलक लगाएं तथा कलाई पर राखी बांधें। भाई को मिष्ठान खिलाकर भाई से उपहार अथवा दक्षिणा ग्रहण करें।
रक्षाबंधन के बारे में
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, इंद्र-इंद्राणी व द्रौपदी-कृष्ण की कथाएं, तथा राखी बांधने की विधि की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?
रक्षाबंधन प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो सामान्यतः अगस्त में आती है।
रक्षाबंधन पर भद्रा काल क्यों टाला जाता है?
भद्रा काल को अशुभ माना जाता है, और मान्यता है कि इस अवधि में राखी बांधने से भाई की भलाई की बजाय अनिष्ट होता है, इसलिए मुहूर्त सदैव भद्रा-रहित समय में रखा जाता है।
क्या रक्षाबंधन केवल सगे भाई-बहनों के लिए है?
नहीं, चचेरे-ममेरे भाई-बहन, करीबी मित्र, तथा प्रतीकात्मक रूप से सैनिकों व पेड़ों को भी राखी बांधी जाती है, जो सुरक्षा व स्नेह के व्यापक भाव को दर्शाता है।
नारली पूर्णिमा क्या है?
नारली पूर्णिमा कोंकण व महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में रक्षाबंधन के दिन ही मनाई जाने वाली परंपरा है, जिसमें मछुआरे समुद्र देवता को नारियल अर्पित कर मछली पकड़ने के मौसम का शुभारंभ करते हैं।
