हनुमान जयंती की तिथि भारत में सर्वाधिक क्षेत्रीय विविधता वाली तिथियों में से एक है। उत्तर भारत में इसे चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में इसी दिन से 41 दिन की दीक्षा आरंभ होकर वैशाख कृष्ण दशमी को समाप्त होती है, तमिलनाडु व केरल में मार्गशीर्ष अमावस्या को, तथा कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। सटीक तिथि हेतु अपनी क्षेत्रीय परंपरा व नज़दीकी पंचांग देखें।
हनुमान जयंती का महत्व
कथा के अनुसार, माता अंजना व वानरराज केसरी की तपस्या से प्रसन्न होकर, तथा भगवान शिव के अंश व पवन देव की कृपा से, भगवान हनुमान का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें 'पवनपुत्र', 'अंजनिपुत्र' तथा 'रुद्रावतार' भी कहा जाता है।
एक प्रसिद्ध बाल्यकाल की कथा के अनुसार, बालक हनुमान ने उगते सूर्य को फल समझकर उसे निगलने का प्रयास किया। इससे संसार में अंधकार छा गया, जिससे क्रोधित होकर इंद्र देव ने अपने वज्र से उनकी ठुड्डी (हनु) पर प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी टेढ़ी हो गई और उन्हें 'हनुमान' नाम मिला। पवन देव इस आघात से क्रोधित होकर वायु का प्रवाह रोक देने पर, समस्त देवताओं ने प्रसन्न होकर हनुमान जी को अनेक दिव्य शक्तियों व अमरता का वरदान दिया।
भगवान हनुमान को भक्ति, शक्ति, ब्रह्मचर्य व सेवाभाव का साक्षात प्रतीक माना जाता है, तथा वे रामायण में श्रीराम के परम भक्त व सहायक के रूप में पूजे जाते हैं। उन्हें 'चिरंजीवी' अर्थात अमर माना जाता है, इसीलिए यह पर्व उनके जन्म का 'जयंती' न होकर भी श्रद्धा से 'जन्मोत्सव' के रूप में मनाया जाता है।
हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है
भक्त प्रातःकाल स्नान कर हनुमान मंदिर जाते हैं, जहां भगवान हनुमान की प्रतिमा पर सिंदूर व चमेली के तेल का लेप किया जाता है, जो उनकी अमरता व शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
दिनभर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड व बजरंग बाण का पाठ किया जाता है, तथा अनेक स्थानों पर अखंड पाठ व भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। बूंदी व बेसन के लड्डू का भोग विशेष रूप से अर्पित किया जाता है।
अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर सहित अनेक नगरों में भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में इसी दिन से 41 दिन की दीक्षा लेकर भक्त कठोर नियमों का पालन करते हैं, जो वैशाख कृष्ण दशमी को संपन्न होती है।
हनुमान जयंती पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर हनुमान मंदिर जाएं अथवा घर पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। सिंदूर व चमेली के तेल का लेप अर्पित कर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड अथवा बजरंग बाण का पाठ करें। बूंदी अथवा बेसन के लड्डू का भोग अर्पित कर आरती करें।
हनुमान जयंती के बारे में
हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का पर्व है, जो उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को, तथा अन्य क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न तिथियों पर मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर हनुमान जी के जन्म व नामकरण की कथा, उनके चिरंजीवी स्वरूप, तथा क्षेत्रीय परंपराओं की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?
उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः मार्च-अप्रैल में आती है। अन्य क्षेत्रों में तिथि भिन्न होती है।
हनुमान जी को यह नाम कैसे मिला?
बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर निगलने के प्रयास में इंद्र देव के वज्र-प्रहार से उनकी ठुड्डी (हनु) टेढ़ी हो गई थी, इसी कारण उन्हें 'हनुमान' नाम मिला।
हनुमान जयंती की तिथि क्षेत्र अनुसार भिन्न क्यों है?
विभिन्न क्षेत्रों में हनुमान जी के जन्म व जीवन-प्रसंगों से जुड़ी भिन्न स्थानीय परंपराएं व पंचांग-गणनाएं प्रचलित हैं, जिसके कारण उत्तर भारत, आंध्र प्रदेश-तेलंगाना, तमिलनाडु-केरल व कर्नाटक में यह पर्व अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है।
हनुमान जी को चिरंजीवी क्यों माना जाता है?
भगवान राम से मिले वरदान तथा देवताओं की कृपा से हनुमान जी को अमरता प्राप्त है, इसीलिए उन्हें आठ चिरंजीवियों में से एक माना जाता है, जो आज भी पृथ्वी पर विद्यमान माने जाते हैं।
