श्री काल भैरव मंदिर, उज्जैन
काल भैरव मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव का एक प्राचीन मंदिर है, जिन्हें उज्जैन नगरी का कोतवाल (रक्षक) माना जाता है, यह मंदिर अपनी मदिरा-प्रसाद परंपरा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
श्री काल भैरव मंदिर, उज्जैन का महत्व
काल भैरव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के अवंती खंड में मिलता है, तथा मान्यता है कि इसका मूल निर्माण प्राचीन काल में राजा भद्रसेन द्वारा करवाया गया था। यहां से परमार काल (9वीं-13वीं सदी) की शिव, पार्वती, विष्णु व गणेश की प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई हैं, जो इस स्थल के प्राचीन महत्व को दर्शाती हैं।
काल भैरव को उज्जैन नगरी का 'कोतवाल' अर्थात मुख्य रक्षक माना जाता है, जिन्हें स्वयं महाकाल ने नगरी की सुरक्षा का दायित्व सौंपा था। वर्ष 1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध के पश्चात मराठा सेनापति महादजी शिंदे ने उत्तर भारत में मराठा साम्राज्य पुनर्स्थापित करने की मन्नत मांगते हुए भगवान को अपनी पगड़ी अर्पित की थी, तथा सफलता मिलने पर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, तभी से यहां भगवान का मस्तक चांदी का बना है व मराठा शैली की पगड़ी धारण किए रहता है।
श्री काल भैरव मंदिर, उज्जैन दर्शन की जानकारी
इस मंदिर की सबसे विशिष्ट परंपरा है भगवान को मदिरा अर्पित करना, तांत्रिक पंचमकार पूजा की यह प्रथा शताब्दियों से चली आ रही है, तथा श्रद्धालु यहां छोटी बोतलों में मदिरा लेकर आते हैं, जिसे पुजारी भगवान की प्रतिमा को अर्पित करते हैं। धोखाधड़ी रोकने हेतु वर्ष 2015 से मंदिर परिसर में सरकार द्वारा लाइसेंसशुदा काउंटर स्थापित किए गए हैं।
काल भैरव मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है तथा उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से निकट है, जिस कारण अधिकांश श्रद्धालु दोनों मंदिरों के दर्शन एक ही यात्रा में करते हैं।
श्री काल भैरव मंदिर, उज्जैन कैसे पहुंचें
श्री काल भैरव मंदिर, उज्जैन के बारे में
काल भैरव मंदिर उज्जैन में स्थित भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव का एक प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर है। इस पृष्ठ पर इसका ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व, मदिरा-प्रसाद परंपरा तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
काल भैरव मंदिर कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के उज्जैन में, भैरवगढ़ क्षेत्र में, शिप्रा नदी के तट पर स्थित है।
काल भैरव को उज्जैन का कोतवाल क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि स्वयं महाकाल ने काल भैरव को उज्जैन नगरी की सुरक्षा का दायित्व सौंपा था, जिस कारण उन्हें नगरी का कोतवाल अर्थात मुख्य रक्षक माना जाता है।
मंदिर में मदिरा-प्रसाद की परंपरा क्या है?
यहां तांत्रिक पंचमकार पूजा परंपरा के अंतर्गत श्रद्धालु भगवान को मदिरा अर्पित करते हैं, जो सदियों पुरानी प्रथा है। धोखाधड़ी रोकने हेतु मंदिर में सरकार द्वारा लाइसेंसशुदा काउंटर बनाए गए हैं।
काल भैरव मंदिर का जीर्णोद्धार किसने करवाया?
वर्तमान मंदिर संरचना का जीर्णोद्धार वर्ष 1761 के पानीपत युद्ध के पश्चात मराठा सेनापति महादजी शिंदे द्वारा करवाया गया था।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च का समय सर्वोत्तम रहता है। काल भैरव जयंती के अवसर पर तथा महाकालेश्वर दर्शन के साथ यात्रा करने पर यहां विशेष भीड़ रहती है।