मुख्यचालीसाश्री भैरव चालीसा

श्री भैरव चालीसा

भैरव चालीसा भगवान भैरव की स्तुति में रचित चालीसा है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री भैरव चालीसा
चौपाई/३६

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना४ दोहे · ३६ चौपाई
पाठ समय७ मिनट
दोहा

श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ।
चालीसा वंदन करौं, श्री शिव भैरवनाथ॥

श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल।
श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल॥

चौपाई

जय जय श्री काली के लाला।
जयति जयति काशी-कुतवाला॥

जयति बटुक-भैरव भय हारी।
जयति काल-भैरव बलकारी॥

जयति नाथ-भैरव विख्याता।
जयति सर्व-भैरव सुखदाता॥

भैरव रूप कियो शिव धारण।
भव के भार उतारण कारण॥

भैरव रव सुनि हवै भय दूरी।
सब विधि होय कामना पूरी॥

शेष महेश आदि गुण गायो।
काशी-कोतवाल कहलायो॥

जटा जूट शिर चंद्र विराजत।
बाला मुकुट बिजायठ साजत॥

कटि करधनी घुंघरू बाजत।
दर्शन करत सकल भय भाजत॥

जीवन दान दास को दीन्ह्यो।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो॥

वसि रसना बनि सारद-काली।
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली॥

धन्य धन्य भैरव भय भंजन।
जय मनरंजन खल दल भंजन॥

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा।
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा॥

जो भैरव निर्भय गुण गावत।
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत॥

रूप विशाल कठिन दुख मोचन।
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन॥

अगणित भूत प्रेत संग डोलत।
बम बम बम शिव बम बम बोलत॥

रुद्रकाय काली के लाला।
महा कालहू के हो काला॥

बटुक नाथ हो काल गंभीरा।
श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥

करत तीनहूं रूप प्रकाशा।
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा॥

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन॥

तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं।
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं॥

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय।
जय उन्नत हर उमा नन्द जय॥

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय।
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥

महा भीम भीषण शरीर जय।
रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय॥

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय।
स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय॥

निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥

त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय।
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय।
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥

रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर।
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥

करि मद पान शम्भु गुणगावत।
चौंसठ योगिन संग नचावत॥

करत कृपा जन पर बहु ढंगा।
काशी कोतवाल अड़बंगा॥

देयं काल भैरव जब सोटा।
नसै पाप मोटा से मोटा॥

जानकर निर्मल होय शरीरा।
मिटै सकल संकट भव पीरा॥

श्री भैरव भूतों के राजा।
बाधा हरत करत शुभ काजा॥

ऐलादी के दुख निवारयो।
सदा कृपा करि काज सम्हारयो॥

सुन्दरदास सहित अनुरागा।
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥

श्री भैरव जी की जय लेख्यो।
सकल कामना पूरण देख्यो॥

अंतिम दोहा

जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार।
कृपा दास पर कीजिये, शंकर के अवतार॥

जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार।
उस घर सर्वानन्द हों, वैभव बड़े अपार॥

काउंटर

व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।

लक्ष्य चुनें
/ ११

श्री भैरव चालीसा पाठ विधि

मंगलवार अथवा शनिवार को रात्रि में स्नान के पश्चात, सरसों के तेल का दीपक जलाकर पाठ करें। पाठ के बाद किसी जरूरतमंद या कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

पाठ दिवस
मंगलवार, शनिवार एवं काल भैरव अष्टमी
आगे पढ़ें · Next
हनुमान चालीसा
स्तोत्र · ८ मिनट
पाठ खोलें →

श्री भैरव चालीसा के बारे में

भैरव चालीसा भगवान भैरव की स्तुति में रचित चालीसा है, जिन्हें भगवान शिव का उग्र अवतार और काशी का कोतवाल माना जाता है। इसमें बटुक भैरव, काल भैरव, नाथ भैरव और सर्व भैरव जैसे उनके विविध स्वरूपों तथा उनके त्रिशूल, डमरू और कुत्ते के वाहन का वर्णन है। रचना दो दोहों से आरंभ होकर छत्तीस चौपाइयों में आगे बढ़ती है और दो दोहों के साथ समाप्त होती है। ध्यान रहे, 'चालीसा' नाम के बावजूद यह पाठ चालीस नहीं, छत्तीस चौपाइयों का है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक चौपाई के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

अज्ञात के बारे में

भैरव चालीसा में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। इसमें भगवान भैरव को शिव के उग्र अवतार और काशी के कोतवाल के रूप में वर्णित किया गया है, तथा बटुक भैरव, काल भैरव, नाथ भैरव और सर्व भैरव जैसे उनके विविध स्वरूपों की जय-जयकार की गई है। यह चालीसा विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार और काल भैरव अष्टमी के दिन भक्तों द्वारा पढ़ी जाती है।

सामान्य प्रश्न

भैरव चालीसा की रचना किसने की?

चालीसा में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

इसमें कुल कितनी चौपाई हैं?

दो आरंभिक दोहे, छत्तीस चौपाई और दो समापन दोहे हैं। 'चालीसा' नाम के बावजूद यह चालीस नहीं, छत्तीस चौपाइयों का पाठ है।

पाठ का उत्तम दिन और समय क्या है?

मंगलवार और शनिवार को, विशेषकर रात्रि में पढ़ना फलदायी माना जाता है। काल भैरव अष्टमी पर भी विशेष माना जाता है।

भैरव चालीसा पाठ के क्या लाभ हैं?

इसका नियमित पाठ भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है, तथा आत्मबल और साहस भी देता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक चौपाई का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

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