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श्री बृहस्पति देव आरती

बृहस्पति देव आरती, जय बृहस्पति देवा, देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसके पाठ से संशय दूर होते हैं और मनोरथ पूर्ण होते हैं, यहां पूर्ण पाठ अर्थ सहित उपलब्ध है।

कड़ी१/७

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ७ कड़ी
पाठ समय४ मिनट
स्थायी

जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा॥

कड़ी

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी॥

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय।
बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय॥

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श्री बृहस्पति देव आरती पाठ विधि

गुरुवार को पीले वस्त्र धारण कर, केले के पौधे के समक्ष दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'जय बृहस्पति देवा' दोहराएं।

पाठ दिवस
गुरुवार
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स्तोत्र · ८ मिनट
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श्री बृहस्पति देव आरती के बारे में

बृहस्पति देव आरती देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की स्तुति में गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसमें उन्हें परमात्मा, अंतर्यामी और भक्तों का कल्याण करने वाला बताया गया है। आरती एक स्थायी पंक्ति और सात कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। इसमें देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को परमात्मा, अंतर्यामी और भक्तों का कल्याण करने वाला बताया गया है। यह आरती विशेष रूप से गुरुवार के व्रत में भक्तों द्वारा गाई जाती है।

बृहस्पति देव आरती के लाभ

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से पाप-दोष और संशय दूर होते हैं तथा गुरु देव की कृपा से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं; गुरुवार को पीले वस्त्र धारण कर इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

बृहस्पति देव आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और सात कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

बृहस्पति देव आरती पाठ का उत्तम समय क्या है?

गुरुवार को पीले वस्त्र धारण कर, केले के पौधे के समक्ष दीप जलाकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

बृहस्पति देव आरती के क्या लाभ हैं?

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से पाप-दोष और संशय दूर होते हैं तथा गुरु देव की कृपा से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं; गुरुवार को पीले वस्त्र धारण कर इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

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