गुरु पूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है, तथा बौद्ध परंपरा में इसी तिथि को भगवान बुद्ध के सारनाथ में प्रथम उपदेश के स्मरण में भी मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, इसीलिए इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास को चारों वेदों का संकलन करने, अठारह पुराणों की रचना करने तथा महाभारत जैसे महाकाव्य के प्रणेता होने का श्रेय प्राप्त है। उन्हें सनातन परंपरा में आदि गुरु के रूप में पूजा जाता है।
सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर के समान अथवा उससे भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इसी भाव को दर्शाने वाला श्लोक 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः' गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।
बौद्ध परंपरा में इसी तिथि को भगवान बुद्ध द्वारा सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिए जाने के स्मरण में भी मनाया जाता है, तथा जैन परंपरा में भी इस दिन गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है
शिष्य अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उन्हें पुष्प, वस्त्र व फल भेंट करते हैं, तथा उनके मार्गदर्शन व शिक्षा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। जिनके गुरु समक्ष उपस्थित नहीं हो पाते, वे उनका स्मरण कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आश्रमों व शिक्षण संस्थानों में इस दिन विशेष सत्संग, प्रवचन तथा वेदव्यास जी की पूजा का आयोजन किया जाता है। अनेक भक्त इस दिन फलाहार व्रत रखकर आध्यात्मिक साधना में समय व्यतीत करते हैं।
योग व अध्यात्म की परंपरा में गुरु पूर्णिमा को भगवान शिव के आदि योगी अथवा आदि गुरु के रूप में सप्तर्षियों को योग-ज्ञान प्रदान करने के दिन के रूप में भी मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर अपने गुरु का ध्यान करें अथवा उनके समक्ष उपस्थित होकर चरण स्पर्श करें। उन्हें पुष्प, वस्त्र व फल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। महर्षि वेदव्यास का स्मरण कर उनकी पूजा करें, तथा दिनभर फलाहार व्रत रखते हुए सत्संग व स्वाध्याय में समय व्यतीत करें।
गुरु पूर्णिमा के बारे में
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पर्व है, जो महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव तथा अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, महर्षि वेदव्यास का योगदान, तथा गुरु पूजन की परंपरा की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?
गुरु पूर्णिमा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः जून-जुलाई में आती है।
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?
इसी तिथि को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का संकलन, पुराणों की रचना तथा महाभारत की रचना की, इसीलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
गुरु पूर्णिमा पर क्या किया जाता है?
इस दिन शिष्य अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उन्हें पुष्प, वस्त्र व फल भेंट करते हैं, तथा उनके मार्गदर्शन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
क्या गुरु पूर्णिमा अन्य परंपराओं में भी मनाई जाती है?
हां, बौद्ध परंपरा में इसी तिथि को भगवान बुद्ध के सारनाथ में प्रथम उपदेश के स्मरण में, तथा जैन परंपरा में भी गुरुओं के सम्मान में मनाया जाता है।
