मुख्यत्योहारनाग पंचमी
नाग देवता की पूजा · श्रावण शुक्ल पंचमी

नाग पंचमी

नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जिस पर नाग देवताओं की पूजा कर उनसे सर्प-भय से रक्षा की कामना की जाती है।

नाग पंचमी
अगली तिथि
६ अगस्त २०२७

नाग पंचमी का शुभ पूजन मुहूर्त सामान्यतः दिन के प्रथम प्रहर में रखा जाता है, जिसका सटीक समय शहर अनुसार बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें।

नाग पंचमी का महत्व

सनातन परंपरा में नागों को देवता के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव सर्पों को आभूषण के रूप में धारण करते हैं, तथा भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विराजमान रहते हैं। इसी आधार पर श्रावण मास की पंचमी तिथि को नाग देवताओं के सम्मान में नाग पंचमी मनाई जाती है।

शिव चालीसा
चालीसा · नाग पंचमी पूजन में पाठ

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने बाल्यावस्था में यमुना नदी में निवास करने वाले विषैले सर्प कालिया का मान-मर्दन कर उसे यमुना छोड़कर जाने का आदेश दिया था, यह घटना भी श्रावण की इसी पंचमी तिथि से जोड़ी जाती है। एक अन्य कथा में जनमेजय के सर्प यज्ञ से आस्तीक मुनि ने नागवंश की रक्षा इसी तिथि को की थी।

किसानों के लिए भी यह पर्व महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्षा ऋतु में सर्प प्रायः खेतों व घरों के निकट आ जाते हैं। नाग देवता की पूजा कर उनसे सर्प-भय से रक्षा तथा फसल की सुरक्षा की कामना की जाती है।

नाग पंचमी कैसे मनाई जाती है

इस दिन घर की दीवार पर अथवा मिट्टी की पट्टिका पर नाग देवता का चित्र बनाकर, अथवा नाग की चांदी या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है।

नाग देवता को दूध, हल्दी, रोली, अक्षत तथा पुष्प अर्पित किए जाते हैं। कई क्षेत्रों में सांपों के बिलों के पास भी दूध अर्पित किया जाता है, यद्यपि पशु-चिकित्सक इसे सांपों के लिए हानिकारक बताते हैं, इसलिए मूर्ति अथवा चित्र पूजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस दिन भूमि खोदने व हल चलाने का कार्य वर्जित माना जाता है, यह मानते हुए कि इससे भूमिगत सर्पों को हानि पहुंच सकती है। संध्या समय नाग देवता की कथा सुनकर व्रत का पारण किया जाता है।

नाग पंचमी पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर घर में नाग देवता का चित्र अथवा प्रतिमा स्थापित करें। दूध, हल्दी, रोली, अक्षत व पुष्प अर्पित कर धूप-दीप से आरती करें। दिनभर भूमि खोदने का कार्य न करें, तथा संध्या समय कथा सुनकर फलाहार अथवा एक समय भोजन के साथ व्रत का पारण करें।

नाग पंचमी के बारे में

नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें नाग देवताओं की पूजा की जाती है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, कालिया-दमन व आस्तीक मुनि की कथाएं, तथा पूजा-विधि की जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

नाग पंचमी कब मनाई जाती है?

नाग पंचमी प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की शुक्ल पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः जुलाई-अगस्त में आती है।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व नाग देवताओं के सम्मान में तथा सर्प-भय से रक्षा की कामना से मनाया जाता है, तथा इसे भगवान कृष्ण के कालिया-दमन व ऋषि आस्तीक की कथाओं से भी जोड़ा जाता है।

क्या सांप के बिल पर दूध चढ़ाना उचित है?

यह परंपरागत रूप से प्रचलित है, परंतु पशु-चिकित्सकों के अनुसार दूध सांपों के लिए उपयुक्त आहार नहीं है, इसलिए घर में नाग देवता की प्रतिमा अथवा चित्र की पूजा करना अधिक उचित माना जाता है।

नाग पंचमी को भूमि खोदना वर्जित क्यों है?

मान्यता है कि इस दिन भूमि खोदने अथवा हल चलाने से भूमिगत सर्पों को हानि पहुंच सकती है, इसलिए इस कार्य से बचा जाता है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवताशेषनाग, वासुकी नाग
तिथिश्रावण शुक्ल पंचमी
विशेष अनुष्ठाननाग प्रतिमा पूजन, दूध अर्पण
शुभ समयदिन का प्रथम प्रहर
व्रत प्रकारएक समय भोजन अथवा फलाहार