मुख्यमंदिरश्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम
प्रसिद्ध मंदिर · केरल

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का एक अत्यंत प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां भगवान शेषनाग पर अनंत शयन मुद्रा में विराजमान हैं, यह विश्व के सर्वाधिक संपन्न मंदिरों में गिना जाता है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम का महत्व

मान्यता है कि दिवाकर मुनि नामक एक विष्णु-भक्त तुलु ब्राह्मण संत की गहन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु एक नटखट बालक के रूप में प्रकट हुए, तथा मुनि को अनंतनकाडु वन तक ले गए, जहां उन्होंने अपना विशाल अनंत शयन स्वरूप दिखाया। मुनि इतने विशाल स्वरूप हेतु मंदिर न बना सके, अतः भगवान ने वचन दिया कि वे यहीं इसी स्वरूप में सदैव विराजमान रहेंगे, इसी कथा से इस नगर का नाम 'तिरुवनंतपुरम' (अनंत का पावन नगर) पड़ा।

विष्णु चालीसा
चालीसा · पद्मनाभ पूजन में पाठ

गर्भगृह में भगवान विष्णु 12,008 शालिग्रामों से निर्मित 18 फुट लंबी अनंत शयन प्रतिमा के रूप में शेषनाग पर विराजमान हैं, जिनके दर्शन आकार की विशालता के कारण तीन अलग-अलग द्वारों से होते हैं, पहले द्वार से मुख व हाथ, दूसरे से नाभि क्षेत्र, तथा तीसरे से चरणों के दर्शन होते हैं। वर्ष 1750 में त्रावणकोर के राजा अनिषम थिरुनल मार्तंड वर्मा ने 'त्रिपादिदानम' कर अपना संपूर्ण राज्य भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया था, तथा तभी से त्रावणकोर के शासक स्वयं को 'पद्मनाभ दास' (पद्मनाभ के सेवक) कहते आए हैं।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम दर्शन की जानकारी

मंदिर की स्थापत्य कला द्रविड़ शैली व केरल की स्थानीय शैली का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है, जिसमें 100 फुट ऊंचा गोपुरम व नक्काशीदार स्तंभों वाले लंबे गलियारे शामिल हैं। मंदिर में प्रवेश केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही अनुमत है, पुरुषों को बिना शर्ट के धोती/मुंडु तथा महिलाओं को साड़ी या मुंडु-नेरियातु पहनना अनिवार्य है; प्रवेश द्वार पर धोती किराए पर भी उपलब्ध रहती है।

वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर मंदिर के तहखानों की जांच में स्वर्ण, रत्न व बहुमूल्य वस्तुओं का विशाल खजाना मिला था, जिसके कारण यह विश्व के सर्वाधिक संपन्न मंदिरों में गिना जाने लगा, छह में से पांच तहखाने खोले गए, जबकि तहखाना 'बी' को पवित्र मानते हुए नहीं खोला गया। वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने त्रावणकोर के पूर्व राजपरिवार को मंदिर के न्यासी (शेबेट) के रूप में प्रबंधन का अधिकार सौंपते हुए इस लंबे विवाद का समाधान किया।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम कैसे पहुंचें

निकटतम हवाई अड्डा
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम है (लगभग 6 किमी दूर)
निकटतम रेलवे स्टेशन
तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन, मंदिर से मात्र लगभग 2 किमी दूर
सड़क मार्ग
तिरुवनंतपुरम शहर के भीतर फोर्ट क्षेत्र स्थित होने के कारण यहां सड़क मार्ग से सुगमता से पहुंचा जा सकता है।
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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम के बारे में

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का एक अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है। इस पृष्ठ पर इसका पौराणिक महत्व, अनंत शयन स्वरूप तथा दर्शन नियमों व यात्रा से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

पद्मनाभस्वामी मंदिर कहां स्थित है?

यह केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के फोर्ट क्षेत्र में स्थित है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

यह भगवान विष्णु के अनंत शयन स्वरूप, 1750 के त्रिपादिदानम इतिहास, तथा वर्ष 2011 में इसके तहखानों में मिले विशाल खजाने के कारण प्रसिद्ध है, जिसने इसे विश्व के सर्वाधिक संपन्न मंदिरों में गिना जाने योग्य बना दिया।

मंदिर में प्रवेश हेतु क्या नियम हैं?

मंदिर में प्रवेश केवल हिंदू श्रद्धालुओं को अनुमत है, तथा सख्त वस्त्र संहिता लागू है, पुरुषों हेतु बिना शर्ट के धोती/मुंडु व महिलाओं हेतु साड़ी या मुंडु-नेरियातु अनिवार्य है।

भगवान के दर्शन तीन द्वारों से क्यों होते हैं?

भगवान की अनंत शयन प्रतिमा 18 फुट लंबी होने के कारण उसे एक ही द्वार से पूर्ण रूप से नहीं देखा जा सकता, अतः पहले द्वार से मुख व हाथ, दूसरे से नाभि, तथा तीसरे से चरणों के दर्शन होते हैं।

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यात्रा हेतु उचित समय

अक्टूबर से मार्च का समय सर्वोत्तम रहता है। मंदिर में प्रवेश केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही अनुमत है, तथा वस्त्र संबंधी नियमों का पालन अनिवार्य है, पुरुषों हेतु धोती (बिना शर्ट के) व महिलाओं हेतु साड़ी या मुंडु-नेरियातु।

मुख्य जानकारी

देवताभगवान विष्णु (अनंत पद्मनाभ)
स्थानतिरुवनंतपुरम, केरल
प्रतिमा18 फुट लंबी, 12,008 शालिग्रामों से निर्मित
विशिष्ट पहचानविश्व के सर्वाधिक संपन्न मंदिरों में से एक
प्रवेश नियमकेवल हिंदुओं हेतु, सख्त वस्त्र संहिता लागू