कैंची धाम, नैनीताल
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में कोसी नदी के तट पर स्थित संत नीम करौली बाबा का एक प्रसिद्ध आश्रम है, जिसे उन्होंने स्वयं वर्ष 1964 में हनुमान जी के मंदिर के साथ स्थापित किया था।
कैंची धाम, नैनीताल का महत्व
नीम करौली बाबा (महाराजजी) एक सिद्ध संत माने जाते हैं, जिन्हें भक्तगण हनुमान जी का ही स्वरूप मानते हैं। मान्यता है कि युवावस्था में एक बार बिना टिकट यात्रा करने के कारण उन्हें एक रेलगाड़ी से उतार दिया गया था, किंतु उनके उतरने के पश्चात गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी, जब तक उन्हें पुनः गाड़ी में सम्मानपूर्वक न बिठाया गया। यह घटना उत्तर प्रदेश के नीब करौली गांव में हुई मानी जाती है, जिससे उनका नाम 'नीम करौली बाबा' पड़ा।
बाबा ने वर्ष 1964 में स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान की गई भूमि पर हनुमान जी के मंदिर सहित इस आश्रम की स्थापना की, तथा अपने जीवन के अंतिम वर्ष यहीं व्यतीत किए। उनकी 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में मृत्यु हुई। कैंची नाम इस स्थान पर पहाड़ियों के मिलने से बनने वाले कैंची जैसे तीखे मोड़ों के कारण पड़ा है।
कैंची धाम, नैनीताल दर्शन की जानकारी
बाबा के अनुयायियों में रामदास (रिचर्ड अल्पर्ट) व लैरी ब्रिलियंट जैसे कई पश्चिमी साधकों के नाम शामिल हैं, जो उनसे मिलने यहां आए थे, तथा बाद में स्टीव जॉब्स की कैंची धाम यात्रा भी विश्वभर में चर्चित हुई। इसी कारण यह आश्रम भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अत्यंत लोकप्रिय है।
स्थापना दिवस (15 जून) के अवसर पर यहां विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। सामान्य दिनों में भी आश्रम की शांत व प्राकृतिक वादियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
कैंची धाम, नैनीताल कैसे पहुंचें
कैंची धाम, नैनीताल के बारे में
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित संत नीम करौली बाबा का एक प्रसिद्ध आश्रम है। इस पृष्ठ पर इनका जीवन-परिचय, आश्रम की स्थापना तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
कैंची धाम कहां स्थित है?
यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में, भवाली के निकट, नैनीताल से लगभग 38 किमी दूर स्थित है।
नीम करौली बाबा कौन थे?
नीम करौली बाबा एक सिद्ध संत थे, जिन्हें भक्तगण हनुमान जी का स्वरूप मानते हैं। उन्होंने वर्ष 1964 में कैंची धाम आश्रम की स्थापना की तथा 1973 में वृंदावन में देह त्यागी।
कैंची धाम का स्थापना दिवस कब मनाया जाता है?
यह प्रतिवर्ष 15 जून को मनाया जाता है, जब यहां विशाल भंडारे का आयोजन होता है।
कैंची नाम कैसे पड़ा?
यह नाम इस स्थान पर पहाड़ियों के मिलने से बनने वाले कैंची जैसे तीखे मोड़ों के कारण पड़ा है।
संबंधित पाठ
Related Readingsव्रत एवं उपकरण
Vrat & Toolsसंबंधित खोज
यात्रा हेतु उचित समय
मार्च से जून तथा सितंबर से नवंबर का समय सर्वोत्तम रहता है। 15 जून को मनाए जाने वाले स्थापना दिवस के अवसर पर यहां विशाल भंडारे व भारी भीड़ का आयोजन होता है।